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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : बिहार में अपनी जमीन का मालिकाना हक पुख्ता करने का इंतजार कर रहे करोड़ों लोगों के लिए बड़ी खबर है। सूबे के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने राज्य में चल रहे विशेष भूमि सर्वेक्षण (Land Survey) को लेकर सरकार का लक्ष्य स्पष्ट कर दिया है। सरकार का संकल्प है कि जमीन से जुड़े दशकों पुराने विवादों को खत्म कर एक पारदर्शी व्यवस्था लागू की जाए। डिप्टी सीएम ने घोषणा की है कि दिसंबर 2027 तक पूरे बिहार में भूमि सर्वेक्षण का कार्य हर हाल में संपन्न कर लिया जाएगा।

13 मार्च को महामंथन: समीक्षा बैठक में तय होगी आगे की राह

सर्वेक्षण कार्य की गति को और तेज करने के लिए सरकार एक्शन मोड में है। उपमुख्यमंत्री ने बताया कि 13 मार्च 2026 को राजस्व (सर्वे) प्रशिक्षण संस्थान, शास्त्रीनगर में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक बुलाई गई है।

उद्देश्य: इस बैठक में भू-अभिलेख एवं परिमाप निदेशालय के अधिकारियों के साथ हर एक बिंदु पर चर्चा की जाएगी ताकि तय समय सीमा (दिसंबर 2027) के भीतर डिजिटल रिकॉर्ड अपडेट हो सकें।

पारदर्शिता: सर्वे पूरा होने के बाद बिहार के लैंड रिकॉर्ड पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी होंगे, जिससे म्यूटेशन और दाखिल-खारिज में होने वाले भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी।

हड़ताल का साया: 22 जिलों में राजस्व कार्य प्रभावित

एक तरफ सरकार डेडलाइन तय कर रही है, वहीं दूसरी तरफ 'बिहार राजस्व सेवा महासंघ' के आह्वान पर अंचलाधिकारियों (CO) और राजस्व अधिकारियों की हड़ताल ने चुनौतियों को बढ़ा दिया है।

असर: राज्य के 22 जिलों में हड़ताल का व्यापक असर देखा जा रहा है, जिससे जमीन का म्यूटेशन (दाखिल-खारिज), परिमार्जन, ई-मापी और एलपीसी (LPC) जैसे जरूरी काम ठप पड़े हैं।

राहत की खबर: करीब 30 फीसदी अंचलाधिकारी (विशेषकर नए अधिकारी) हड़ताल में शामिल नहीं हैं। मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर और नालंदा जैसे जिलों में कई अंचलों में काम सुचारु रूप से जारी है।

इन जिलों में कामकाज पर लगी 'ब्रेक'

हड़ताल के कारण बक्सर, जहानाबाद, बेगूसराय, वैशाली, मधेपुरा, खगड़िया, पूर्णिया, लखीसराय, बांका, भागलपुर, और चंपारण जैसे जिलों में आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। राजस्व कर्मियों की अनुपस्थिति से परिमार्जन की फाइलें दफ्तरों में धूल फांक रही हैं।

सर्वे से क्या बदलेगा?

भूमि सर्वेक्षण पूरा होने के बाद बिहार में जमीन के टुकड़ों का एक-एक इंच का हिसाब डिजिटल मैप पर होगा।

विवादों का अंत: खूनी संघर्ष और अदालती मुकदमों का मुख्य कारण 'धुंधले रिकॉर्ड' खत्म होंगे।

सही मालिक को हक: पुश्तैनी जमीन के मालिकाना हक को लेकर स्पष्टता आएगी।

सरकारी योजनाओं का लाभ: किसानों को मुआवजे और ऋण लेने में आसानी होगी।