कच्चा तेल 90 डॉलर से नीचे फिसला, लेकिन खाड़ी जंग में सऊदी की एंट्री बिगाड़ सकती है तेल का खेल, सस्ते पेट्रोल-डीजल की उम्मीद कम
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की चाल को लेकर एक बार फिर बड़ी और चौंकाने वाली खबरें सामने आ रही हैं। कुछ समय तक नरमी का रुख दिखाने के बाद, ब्रेंट क्रूड एक बार फिर उछलकर 90 डॉलर प्रति बैरल के बेहद करीब पहुंच गया है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि पश्चिम एशिया (Middle East) के सुलगते हालात में अब दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातक देशों में शुमार सऊदी अरब की सीधी एंट्री हो चुकी है। इस भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बाद भारत समेत दुनियाभर के देशों में पेट्रोल और डीजल के सस्ते होने की उम्मीदें लगभग धूमिल होती नजर आ रही हैं।
खाड़ी युद्ध में सऊदी अरब की एंट्री, क्यों भड़का तेल बाजार?
मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के बीच अमेरिका और सऊदी अरब ने मिलकर इrak में ईरान समर्थित ठिकानों पर बड़े हवाई हमले किए हैं। यह इतिहास में पहला मौका है जब सऊदी अरब ने इस चल रहे संघर्ष में खुलकर अपनी सैन्य भूमिका स्वीकार की है।
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तेल सुविधाओं पर हमले: सऊदी अरब के पूर्वी प्रांत स्थित तेल ठिकानों और रिफाइनरियों को ड्रोन हमलों का निशाना बनाया गया है, जिससे कच्चे तेल की सप्लाई चेन सीधे तौर पर खतरे में पड़ गई है।
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प्रमुख समुद्री मार्गों पर संकट: दुनिया के सबसे संवेदनशील तेल निकास मार्ग—'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) और लाल सागर के 'बाब अल-मंदेब' स्ट्रेट पर मंडराते खतरे ने वैश्विक ऊर्जा बाजार के जानकारों की नींद उड़ा दी है।
90 डॉलर के पास पहुंचा ब्रेंट क्रूड, सप्लाई बफर खत्म
वैश्विक बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका में कम हुए कमर्शियल क्रूड इन्वेंट्री (Commercial Crude Inventories) के चलते ब्रेंट क्रूड में अचानक 7% तक का बड़ा उछाल आया और यह 90 डॉलर प्रति बैरल के मुहाने पर आ खड़ा हुआ।
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घटता रिजर्व: अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों का मानना है कि ग्लोबल मार्केट में तेल के जो बफर स्टॉक या विकल्प थे, वे अब तेजी से कम हो रहे हैं।
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महंगाई का नया झटका: यदि खाड़ी देशों में संघर्ष का दायरा और बढ़ता है, तो कच्चे तेल की कीमतें एक बार फिर बेकाबू होकर बहुत ऊपर जा सकती हैं, जिसका सीधा असर भारत जैसे आयातक देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
क्या भारत में सस्ते होंगे पेट्रोल और डीजल?
भारत अपनी कुल जरूरत का 85% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में ग्लोबल मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमतों में होने वाला हर एक उतार-चढ़ाव सीधे तौर पर देश के ईंधन बाजार को प्रभावित करता है।
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कम होने की उम्मीद क्यों कम: चूंकि कच्ची तेल की कीमतें एक बार फिर 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास मंडरा रही हैं और सप्लाई रूट बाधित होने का खतरा बना हुआ है, तेल कंपनियों के लिए पेट्रोल और डीजल के खुदरा दाम घटाना मुमकिन नहीं दिख रहा है।
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उपभोक्ताओं पर असर: जानकारों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए निकट भविष्य में उपभोक्ताओं को फ्यूल प्राइस से राहत मिलने की उम्मीद बेहद कम है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय तनाव यूं ही जारी रहा तो महंगाई का नया दौर शुरू हो सकता है।