फेड के फैसले से अमेरिका में हाहाकार, मार्केट 1100 अंक क्रैश पर संभला भारत का सेंसेक्स, रुपये में लौटी जान!
अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) के हालिया नीतिगत फैसलों और ब्याज दरों को लेकर आए तीखे बयानों के बाद वैश्विक वित्तीय बाजारों में भूचाल आ गया है। दुनिया के सबसे ताकतवर बाजार अमेरिका में मचे इस हाहाकार का असर तुरंत एशियाई बाजारों पर भी देखने को मिला, जहां वॉल स्ट्रीट के प्रमुख सूचकांक धड़ाम हो गए। अकेले डाओ जोंस (Dow Jones) में करीब 1100 अंकों की भारी-भरकम गिरावट दर्ज की गई, जिससे वैश्विक निवेशकों में हड़कंप मच गया। हालांकि, इस वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) ने एक बार फिर अपनी जबरदस्त आंतरिक ताकत और मजबूती का परिचय दिया है। शुरुआती भारी बिकवाली और दबाव के बाद घरेलू सेंसेक्स और निफ्टी ने निचले स्तरों से शानदार वापसी की, वहीं विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपये (Indian Rupee) ने भी अपनी स्थिति को मजबूती के साथ संभाल लिया है।
वॉल स्ट्रीट में भूचाल, क्यों सहमा अमेरिकी बाजार?
फेडरल रिजर्व के चेयरमैन के हालिया बयानों और महंगाई के आंकड़ों पर नियंत्रण पाने के लिए ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा बनाए रखने के 'हॉकिश' (कठोर) रुख ने अमेरिकी निवेशकों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
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बॉन्ड यील्ड में उछाल: अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में अचानक आई तेजी के कारण निवेशकों ने इक्विटी मार्केट से धड़ाधड़ पैसा निकालना शुरू कर दिया।
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1100 अंकों का बड़ा क्रैश: तकनीकी शेयरों और दिग्गज कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली के चलते अमेरिकी बाजार में ऐसा हाहाकार मचा कि मुख्य सूचकांक 1100 से अधिक अंकों तक लुढ़क गए, जिसका सीधा मनोवैज्ञानिक असर दुनियाभर के बाजारों पर पड़ा।
भारतीय सेंसेक्स ने दिखाई मजबूत रीढ़, निचले स्तरों से शानदार रिकवरी
वैश्विक बाजारों के इस बड़े क्रैश की वजह से भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत बेहद सुस्त और लाल निशान के साथ हुई थी। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा की गई बिकवाली से निवेशकों की धड़कनें तेज हो गई थीं।
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घरेलू निवेशकों का बड़ा सहारा: इस संकट के समय घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) और म्यूचुअल फंड्स ने मसीहा की भूमिका निभाई। बैंकिंग, आईटी और चुनिंदा दिग्गज शेयरों में निचले स्तर पर हुई भारी लिवाली (Buying) के चलते सेंसेक्स ने गोता लगाने के बजाय खुद को तेजी से संभाल लिया।
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भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत फंडामेंटल्स: विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की मजबूत घरेलू मांग और जीडीपी के ठोस आंकड़ों के दम पर भारतीय बाजार ने ग्लोबल झटकों को आसानी से झेल लिया और बड़ी तबाही टल गई।
रुपये में भी लौटी जान, करेंसी मार्केट में दिखा ठहराव
ग्लोबल मार्केट में अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (US Dollar Index) के मजबूत होने और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपये पर भी भारी दबाव देखा गया था।
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आरबीआई (RBI) की पैनी नजर: हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक के सक्रिय हस्तक्षेप और देश के मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) के चलते रुपये में किसी बड़े और अनियंत्रित क्रैश की आशंका को खारिज कर दिया गया।
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स्थिरता की वापसी: कारोबार के आगे बढ़ने के साथ ही रुपये ने अपनी खोई हुई चाल को काफी हद तक वापस पा लिया और करेंसी मार्केट में एक बार फिर स्थिरता लौट आई।