बुकिंग प्लेटफॉर्म पर ‘डार्क पैटर्न’ का खेल पड़ा भारी! CCPA ने SpiceJet पर लगाया ₹1 लाख का जुर्माना; गुमराह करने वाली ट्रिक का भंडाफोड़

बुकिंग प्लेटफॉर्म पर ‘डार्क पैटर्न’ का खेल पड़ा भारी! CCPA ने SpiceJet पर लगाया ₹1 लाख का जुर्माना; गुमराह करने वाली ट्रिक का भंडाफोड़

डिजिटल कॉमर्स के इस दौर में ग्राहकों को चालाकी से अतिरिक्त सेवाएं बेचने या उनकी मर्जी के बिना सहमति लेने वाले ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर सरकार ने सख्ती बढ़ा दी है। इसी कड़ी में, केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने बजट एयरलाइन स्पाइसजेट (SpiceJet) पर एक बड़ी कार्रवाई की है। सीसीपीए ने एयरलाइन के टिकट बुकिंग प्लेटफॉर्म पर ग्राहकों को गुमराह करने वाले 'डार्क पैटर्न' (Deceptive User Interface Practices) का इस्तेमाल करने का दोषी पाते हुए ₹1 लाख का जुर्माना ठोक दिया है।

बिना पूछे ही 'स्पाइसक्लब' में कर देते थे इनरोल

सीसीपीए (CCPA) की चीफ कमिश्नर निधि खरे और कमिश्नर अनुपम मिश्रा की अगुवाई में हुई जांच में यह सामने आया कि स्पाइसजेट के प्लेटफॉर्म पर टिकट बुक करते समय ग्राहकों को धोखे से फंसाया जा रहा था। एयरलाइन अपने बुकिंग पेज पर पहले से टिक किए गए चेकबॉक्स (Pre-ticked Checkbox) का इस्तेमाल कर रही थी। इसके जरिए जैसे ही कोई ग्राहक टिकट बुक करता, वह अपने आप ही स्पाइसजेट के 'स्पाइसक्लब लॉयल्टी प्रोग्राम' में इनरोल हो जाता था, जिसके लिए उसने कोई एक्टिव सहमति नहीं दी थी।

नोटिस के बाद भी नहीं सुधरी एयरलाइन, बदली सिर्फ तरकीब

जांच रिपोर्ट में इस बात का भी खुलासा हुआ कि जब अथॉरिटी ने इस गड़बड़ी को लेकर स्पाइसजेट को नोटिस जारी किया, तो एयरलाइन ने इसे पूरी तरह सुधारने के बजाय चालाकी दिखाई। एयरलाइन ने पुराने चेकबॉक्स को हटाकर एक दूसरा प्री-टिक चेकबॉक्स लगा दिया। इस नए बॉक्स के जरिए ग्राहकों से बिना पूछे ही उनके व्हाट्सएप (WhatsApp), एसएमएस (SMS) और ईमेल पर प्रमोशनल मैसेज भेजने की डिफॉल्ट मंजूरी ली जाने लगी। यानी डिजाइन का रूप तो बदला, लेकिन ग्राहकों को फंसाने का तरीका वही रहा。

सीसीपीए ने पकड़े स्पाइसजेट के 3 'डार्क पैटर्न'

उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के तहत काम करने वाली संस्था ने स्पाइसजेट के ऐप और वेबसाइट पर तीन मुख्य डिजिटल चोरियां (Dark Patterns) पकड़ी हैं:

  • फोर्स्ड एक्शन (जबरन कार्रवाई): प्री-टिक बॉक्स के जरिए बिना ग्राहक की मर्जी के उसे लॉयल्टी प्रोग्राम का हिस्सा बना देना।

  • इंटरफेस इंटरफेरेंस (यूजर इंटरफेस में दखल): कंपनी के फायदे वाले विकल्प को 'डिफॉल्ट' सेट कर देना, जिससे ग्राहक का निर्णय प्रभावित हो।

  • ट्रिक क्वेश्चन (उलझाने वाले सवाल): सहमति की भाषा को जानबूझकर इतना घुमावदार और नेगेटिव बनाना कि आम यूजर भ्रमित होकर हां कर बैठे।

एयरलाइन ने बताया 'टेक्निकल एरर', देनी होगी गारंटी

मामले की सुनवाई के दौरान स्पाइसजेट के प्रतिनिधियों ने प्राधिकरण के सामने दलील दी कि यह कोई जानबूझकर की गई धोखाधड़ी नहीं थी, बल्कि एक तकनीकी खराबी (Technical Error) की वजह से ऐसा हुआ था। हालांकि, सीसीपीए ने इसे कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट 2019 और ई-कॉमर्स रूल्स 2020 का सीधा उल्लंघन माना है। जुर्माना लगाने के साथ ही अथॉरिटी ने स्पाइसजेट को एक लिखित हलफनामा (Undertaking) जमा करने का आदेश दिया है, जिसमें यह पक्का करना होगा कि इन कमियों को हमेशा के लिए पूरी तरह सुधार लिया गया है।

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