Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पश्चिम बंगाल की सियासत में रविवार को उस समय भूचाल आ गया जब महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्य सरकार की व्यवस्थाओं पर सार्वजनिक रूप से अपनी पीड़ा व्यक्त की। दार्जिलिंग जिले में आयोजित 'अंतर्राष्ट्रीय संथाल सम्मेलन' में शामिल होने पहुंचीं राष्ट्रपति ने न केवल आयोजन स्थल के चयन पर सवाल उठाए, बल्कि प्रोटोकॉल की अनदेखी को लेकर भी भावुक टिप्पणी की। इस घटनाक्रम के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ममता सरकार पर तीखा हमला बोला है, जिसे 'शर्मनाक' करार दिया गया है।
"आयोजन स्थल गलत, लोग नहीं पहुंच सके": राष्ट्रपति की भावुक टिप्पणी
विवाद की जड़ सम्मेलन के आयोजन स्थल में किया गया अचानक बदलाव बना। पश्चिम बंगाल सरकार ने अंतिम समय में कार्यक्रम को बिधाननगर से हटाकर बागडोगरा के गोसाईंपुर में स्थानांतरित कर दिया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि आयोजन स्थल की भौगोलिक स्थिति ऐसी थी कि संथाल समुदाय के हजारों लोग वहां चाहकर भी नहीं पहुंच सके। उन्होंने मैदान की ओर इशारा करते हुए कहा, "यहां पास में ही विशाल खुले मैदान थे, जहां 5 लाख लोग आसानी से आ सकते थे। मुझे गहरा दुख है कि मेरे अपने समुदाय के लोग इस उत्सव का हिस्सा नहीं बन पाए।"
पीएम मोदी का तीखा वार: "यह आदिवासी समाज और राष्ट्रपति का अपमान"
राष्ट्रपति की नाराजगी के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर मोर्चा संभाल लिया। पीएम ने लिखा कि टीएमसी सरकार ने "सभी हदें पार कर दी हैं"। उन्होंने कहा, "यह शर्मनाक और अभूतपूर्व है। लोकतंत्र और आदिवासी सशक्तिकरण में विश्वास रखने वाला हर व्यक्ति आज निराश है। राष्ट्रपति जी की पीड़ा ने पूरे देश को आहत किया है।" पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि राष्ट्रपति का पद राजनीति से ऊपर है और उनके प्रोटोकॉल के साथ खिलवाड़ संवैधानिक गरिमा का अपमान है।
प्रोटोकॉल पर रार: मुख्यमंत्री और मंत्रियों की अनुपस्थिति ने बढ़ाया तनाव
संवैधानिक नियमों के अनुसार, जब राष्ट्रपति किसी राज्य के आधिकारिक दौरे पर होते हैं, तो मुख्यमंत्री या कम से कम एक वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री का स्वागत के लिए उपस्थित होना अनिवार्य है। लेकिन सिलीगुड़ी में राष्ट्रपति का स्वागत करने के लिए केवल महापौर गौतम देब ही पहुंचे थे। राष्ट्रपति ने इस पर चुटकी लेते हुए कहा, "मैं खुद को बंगाल की बेटी मानती हूं और ममता जी मेरी छोटी बहन जैसी हैं। मुझे नहीं पता कि वे मुझसे नाराज हैं या क्या बात है, लेकिन प्रोटोकॉल के मुताबिक मुख्यमंत्री को साथ होना चाहिए था।"
ममता बनर्जी का पलटवार और केंद्र की सख्त कार्रवाई
बढ़ते विवाद के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति का स्वागत और विदाई 'राष्ट्रपति सचिवालय' द्वारा अनुमोदित योजना के अनुसार ही की गई थी। ममता ने भाजपा पर राष्ट्रपति पद का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया।
वहीं, केंद्र सरकार इस मामले को हल्के में लेने के मूड में नहीं है। केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव से रविवार शाम तक इस पूरे घटनाक्रम पर 'विस्तृत रिपोर्ट' तलब की है। गृह मंत्रालय ने विशेष रूप से मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और डीजीपी की अनुपस्थिति और रूट में बदलाव पर जवाब मांगा है।




