Prabhat Vaibhav,Digital Desk : लोग आमतौर पर मौसम के अनुसार पानी की बोतलें बदलते रहते हैं। कांच और तांबे की बोतलें सबसे अधिक उपयोग में लाई जाती हैं। तांबे की बोतलों में रखा पानी बैक्टीरिया को नष्ट करने में सहायक होता है।

तांबे की बोतल में रखा पानी शरीर के लिए कई तरह से फायदेमंद माना जाता है। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और जोड़ों के दर्द से राहत दिलाने में सहायक होता है। वहीं, कांच पानी में किसी भी प्रकार के रासायनिक तत्व नहीं छोड़ता है।

तांबे में प्राकृतिक जीवाणुरोधी गुण होते हैं। यदि पानी को तांबे के बर्तन या बोतल में लगभग 16 घंटे तक रखा जाए, तो उसमें मौजूद हानिकारक जीवाणु नष्ट हो जाते हैं। इसी कारण तांबा पानी को शुद्ध रखने और रोगाणुओं को नष्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए तांबे की बोतल में पानी पीना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है।

तांबे की बोतल में पानी पीने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और त्वचा के लिए भी यह लाभकारी माना जाता है। तांबा शरीर में एंजाइमों की कार्यक्षमता को बढ़ाता है। इसके अलावा, तांबा वजन घटाने और हृदय संबंधी बीमारियों में भी फायदेमंद है।

पानी को कांच की बोतल में रखने से उसमें कोई रसायन नहीं मिलते। प्लास्टिक की बोतलों में हानिकारक पदार्थ होते हैं, इसलिए कांच की बोतलें प्लास्टिक की बोतलों से अधिक सुरक्षित मानी जाती हैं।

कांच की बोतलें आमतौर पर सुरक्षित मानी जाती हैं, लेकिन इनके ढक्कनों पर लगे पेंट के छोटे-छोटे कण निकल सकते हैं। इस्तेमाल के दौरान घर्षण से ये कण पानी में मिल सकते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो सकते हैं। इसलिए, कांच की बोतल खरीदते समय अच्छी गुणवत्ता वाला ढक्कन होना बहुत ज़रूरी है।




