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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : गुस्सा या क्रोध एक स्वाभाविक मानवीय भावना है, लेकिन जब यह अनियंत्रित हो जाता है, तो यह केवल रिश्तों को ही नहीं, बल्कि आपके शरीर को भी भीतर से खोखला कर देता है। चिकित्सा विज्ञान और आयुर्वेद दोनों ही इस बात पर सहमत हैं कि क्रोध का एक क्षण हमारे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर गहरा नकारात्मक प्रभाव डालता है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, नींद की कमी और काम के बढ़ते दबाव ने लोगों में चिड़चिड़ापन और गुस्सा बढ़ा दिया है, जो भविष्य में गंभीर बीमारियों का कारण बन रहा है।

क्रोध का शरीर पर प्रहार: हार्मोन से लेकर हृदय तक सब खतरे में

जब हम क्रोधित होते हैं, तो हमारा शरीर 'फाइट या फ्लाइट' मोड में चला जाता है। इस दौरान शरीर में एड्रेनालाईन (Adrenaline) और कोर्टिसोल (Cortisol) जैसे तनाव हार्मोन तेजी से निकलने लगते हैं। इसके परिणाम स्वरूप:

हृदय पर दबाव: हृदय गति और रक्तचाप (Blood Pressure) अचानक बढ़ जाता है, जिससे दिल का दौरा और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।

पाचन तंत्र: आयुर्वेद के अनुसार, क्रोध शरीर में 'पित्त' को बढ़ाता है, जिससे एसिडिटी, अल्सर और पाचन संबंधी समस्याएं होती हैं।

मस्तिष्क और नींद: बार-बार गुस्सा करने से माइग्रेन, एकाग्रता में कमी और अनिद्रा (Insomnia) जैसी मानसिक समस्याएं जन्म लेती हैं।

क्रोध आने पर क्या करें? विज्ञान का '90 सेकंड' फॉर्मूला

मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि गुस्से की लहर हमारे मस्तिष्क में केवल 90 सेकंड तक सक्रिय रहती है। यदि आप उस 90 सेकंड के दौरान खुद को प्रतिक्रिया देने से रोक लेते हैं, तो आप स्थिति को बिगड़ने से बचा सकते हैं।

गहरी सांसें लें: जैसे ही गुस्सा आए, अपनी आंखों को बंद करें और धीमी, गहरी सांस लें। खुली हवा में सांस लेना शरीर के तनाव को तुरंत कम करता है।

ठंडे पानी का जादू: गुस्सा आने पर एक गिलास ठंडा पानी पिएं और चेहरे पर ठंडे पानी के छींटे मारें। इससे शरीर की बढ़ी हुई गर्मी शांत होती है और दिमाग को राहत मिलती है।

आयुर्वेद और आहार: शांत मन के लिए बदलें अपनी थाली

आयुर्वेद में क्रोध को शरीर की बढ़ी हुई गर्मी या पित्त दोष से जोड़ा जाता है। इसे नियंत्रित करने के लिए 'पित्त-शामक' आहार का सेवन अत्यंत लाभकारी होता है।

ठंडी चीजें अपनाएं: अपने आहार में नारियल पानी, घी, खीरा और आंवला शामिल करें।

मसालों का सही चुनाव: सौंफ, धनिया और इलायची का उपयोग शरीर की आंतरिक गर्मी को कम करता है और मानसिक शांति प्रदान करता है।

इनसे बचें: बहुत अधिक तीखा, तला-भुना और कैफीनयुक्त भोजन गुस्से को और अधिक भड़का सकता है।

ध्यान और योग: क्रोध पर विजय का मार्ग

नियमित रूप से योगासन और ध्यान (Meditation) करने से मस्तिष्क का वह हिस्सा मजबूत होता है जो भावनाओं को नियंत्रित करता है। अनुलोम-विलोम और भ्रामरी प्राणायाम क्रोध प्रबंधन (Anger Management) के लिए रामबाण माने जाते हैं। याद रखें, क्रोध को दबाना नहीं, बल्कि उसे समझना और सही दिशा में मोड़ना ही अच्छे स्वास्थ्य की कुंजी है।