Prabhat Vaibhav,Digital Desk : भारत में शिक्षा का इतिहास अगर राज परिवारों के योगदान के बिना देखा जाए, तो वह अधूरा ही रहेगा। इस योगदान में मिथिला क्षेत्र का दरभंगा राज परिवार सर्वोपरि है। दरभंगा राज ने काशी, कोलकाता, इलाहाबाद और पटना जैसे शैक्षणिक केंद्रों में शिक्षा के प्रसार के लिए अद्वितीय योगदान दिया। उनका दृष्टिकोण था कि शिक्षा केवल संस्थान बनाने का नाम नहीं, बल्कि समाज को आत्मनिर्भर बनाने का सबसे प्रभावी माध्यम है। इसी सोच के तहत इस राजवंश ने आधुनिक, शास्त्रीय और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक निवेश किया।
बड़े विश्वविद्यालयों की स्थापना में निर्णायक भूमिका
विधानपरिषद के पूर्व विकास पदाधिकारी और दरभंगा राज के शोधार्थी रमणदत्त झा के अनुसार, महाराजा रामेश्वर सिंह पंडित मदन मोहन मालवीय के अत्यंत करीबी थे। उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) की स्थापना में पांच लाख रुपये का दान दिया। इसके साथ ही वे विश्वविद्यालय के लिए धन-संग्रह अभियान के प्रमुख सूत्रधारों में भी शामिल रहे।
पुस्तकालय और भवन निर्माण में सहयोग
कलकत्ता विश्वविद्यालय और इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पुस्तकालय और भवन निर्माण में भी दरभंगा राज का योगदान उल्लेखनीय रहा। पटना विश्वविद्यालय को महाराजा कामेश्वर सिंह ने अपना पैतृक आवास दरभंगा हाउस (नवलखा पैलेस) दान किया, जहां आज स्नातकोत्तर कक्षाएं संचालित होती हैं। उन्होंने मैथिली भाषा को विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में शामिल करने में भी अहम भूमिका निभाई।
दरभंगा को शिक्षा का केंद्र बनाने की नींव
महाराजा कामेश्वर सिंह ने कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय के लिए अपना भव्य आनंद बाग पैलेस, उससे जुड़े महल और विशाल पुस्तकालय दान किए। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय को नरगौना पैलेस के साथ दरभंगा राज के पुस्तकालय से 70,000 से अधिक दुर्लभ पुस्तकें प्राप्त हुईं। मिथिला शोध संस्थान और राजकीय महारानी रामेश्वरी भारतीय चिकित्सा विज्ञान संस्थान के लिए भी भूमि दान की गई।
चिकित्सा शिक्षा में ऐतिहासिक योगदान
दरभंगा राज परिवार ने चिकित्सा शिक्षा के विकास को भी समान महत्व दिया। दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (DMCH) की स्थापना के लिए करीब 320 एकड़ भूमि और बड़ी राशि उपलब्ध कराई गई। पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) के लिए 1920 में महाराजा रामेश्वर सिंह सबसे बड़े दानदाताओं में शामिल रहे। इसके अतिरिक्त अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के मेडिकल कॉलेज के लिए भी आर्थिक सहयोग दिया गया।
स्कूली शिक्षा, समाजसेवा और समावेशन
महाराजा लक्ष्मेश्वर सिंह ने आधुनिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए राज स्कूल की स्थापना की, जहां अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा दी जाती थी। मिथिला के विभिन्न क्षेत्रों में मिडिल स्कूल खोले गए, जहां शिक्षा पूरी तरह नि:शुल्क थी। सामाजिक सरोकारों के तहत मूक-बधिर और नेत्रहीन विद्यालयों, अनाथालयों और सार्वजनिक पुस्तकालयों की स्थापना की गई ताकि शिक्षा समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
भाषा, संस्कृति और बौद्धिक चेतना
दरभंगा राज ने संस्कृत, दर्शन और न्यायशास्त्र के संरक्षण के साथ-साथ मैथिली भाषा और साहित्य को भी संरक्षित और समृद्ध किया। ‘मिथिला मिहिर’ जैसी पत्रिकाओं के माध्यम से साहित्यिक और सांस्कृतिक चेतना को नई दिशा दी गई।
ज्ञानदान की परंपरा और आधुनिक शिक्षा में योगदान
दरभंगा राज का इतिहास यह प्रमाणित करता है कि इस राजवंश ने शिक्षा को केवल दान नहीं, बल्कि भविष्य निर्माण का आधार माना। विश्वविद्यालयों से लेकर विद्यालयों और शोध संस्थानों तक फैली उनकी यह परंपरा आज भी बिहार और पूरे देश के शिक्षा मानचित्र पर स्पष्ट दिखाई देती है।




