Prabhat Vaibhav,Digital Desk : उत्तर प्रदेश में होली का त्योहार बीतने के बाद भारतीय जनता पार्टी अपने समर्पित कार्यकर्ताओं के लिए खुशियों के नए रंग भरने जा रही है। चुनावी आहट के बीच संगठन को नई ऊर्जा देने के लिए प्रदेश भाजपा ने एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक खेला है। राज्य के नगरीय निकायों में लंबे समय से खाली पड़े 2805 नामित सभासदों के पदों पर नियुक्तियों की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। भाजपा प्रदेश इकाई ने संभावित नामों की सूची राज्य सरकार को भेज दी है, जिसकी आधिकारिक घोषणा होली के ठीक अगले सप्ताह होने की संभावना है।
नगरीय निकायों में होगा बड़ा समायोजन
संगठन द्वारा शासन को भेजी गई सूची के अनुसार, उत्तर प्रदेश के सभी नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी:
17 नगर निगम: प्रत्येक निगम में 10-10 सभासद मनोनीत किए जाएंगे।
200 नगर पालिका परिषद: प्रत्येक पालिका में 5-5 कार्यकर्ताओं को पद मिलेगा।
490 नगर पंचायत: प्रत्येक पंचायत में 3-3 सभासदों की नियुक्ति होगी।
इन नामित सभासदों का कार्यकाल वर्तमान निकायों की शेष 2 वर्ष की अवधि के लिए होगा।
बोर्ड, निगम और आयोगों में भी खाली पद भरे जाएंगे
केवल सभासद ही नहीं, बल्कि इसी माह के भीतर प्रदेश के विभिन्न बोर्डों, आयोगों और निगमों में भी बड़े पैमाने पर नियुक्तियां की जानी हैं। राज्य में लगभग 12 प्रमुख आयोग और बोर्ड ऐसे हैं जहाँ अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों के पद लंबे समय से रिक्त हैं। सबसे अधिक अवसर सहकारिता विभाग, विभिन्न एडवाइजरी कमेटियों और अकादमियों में हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के बीच इस संबंध में गहन मंथन हो चुका है।
मिशन 2027: नाराज कार्यकर्ताओं को साधने की रणनीति
प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह की टीम ने पिछले कुछ महीनों में पूरे प्रदेश का दौरा कर जमीनी फीडबैक लिया है। सूत्रों के मुताबिक, कई क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं के मन में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर मलाल है। विधानसभा चुनाव से पहले इस 'पॉलिटिकल वैक्यूम' को भरने और कार्यकर्ताओं की पहचान सुनिश्चित करने के लिए यह समायोजन बेहद जरूरी माना जा रहा है। 11 जिलाध्यक्षों की हालिया घोषणा में भी जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साफ तौर पर देखा गया है।
चुनावी करंट पैदा करने की कोशिश
पार्टी नेतृत्व का मानना है कि यूजीसी और अन्य स्थानीय मुद्दों के कारण जो नाराजगी उपजी थी, उसे कार्यकर्ताओं को उचित मान-सम्मान और पद देकर दूर किया जा सकता है। सरकार और संगठन के बीच समन्वय बिठाकर अधिक से अधिक चेहरों को सत्ता की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है, ताकि आगामी चुनावों में भाजपा का 'चुनावी करंट' बरकरार रहे।




