Prabhat Vaibhav,Digital Desk : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार (4 अप्रैल 2026) को वाराणसी के शिवपुर स्थित कंपोजिट विद्यालय से नए शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए 'स्कूल चलो अभियान' का भव्य शुभारंभ किया। इस अभियान का मुख्य लक्ष्य प्रदेश के हर बच्चे को स्कूल की दहलीज तक लाना और सरकारी स्कूलों (परिषदीय विद्यालयों) में शिक्षा की गुणवत्ता को कॉन्वेंट स्कूलों के समकक्ष बनाना है।
अभियान के मुख्य बिंदु और लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस अभियान के जरिए राज्य सरकार का लक्ष्य शत-प्रतिशत (100%) नामांकन सुनिश्चित करना है। कोई भी बच्चा, चाहे वह किसी भी पृष्ठभूमि से हो, शिक्षा के अधिकार से वंचित नहीं रहना चाहिए।
छात्रों को मिलने वाली फ्री सुविधाएं
योगी सरकार ने बेसिक शिक्षा विभाग के माध्यम से छात्रों के लिए विशेष सुविधाओं का ऐलान किया है:
निशुल्क पाठ्य-पुस्तकें: सत्र की शुरुआत में ही सभी बच्चों को नई किताबें मुहैया कराई जाएंगी।
यूनिफॉर्म और बैग: छात्रों को स्कूल ड्रेस और बैग के लिए धनराशि सीधे डीबीटी (DBT) के माध्यम से प्रदान की जा रही है।
मिड-डे मील: गुणवत्तापूर्ण भोजन की व्यवस्था।
डिजिटल लर्निंग: कंपोजिट विद्यालयों में स्मार्ट क्लास और लाइब्रेरी की सुविधा।
दो चरणों में चलेगा अभियान
बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह के अनुसार, इस बार अभियान को दो समय सीमाओं में बांटा गया है ताकि कोई बच्चा छूट न जाए:
प्रथम चरण: 4 अप्रैल से 15 अप्रैल 2026 तक।
द्वितीय चरण: 1 जुलाई से 15 जुलाई 2026 तक।
'घर-घर दस्तक' और जागरूकता कार्यक्रम
मुख्यमंत्री ने शिक्षकों और अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे केवल स्कूल में बैठकर इंतजार न करें, बल्कि 7 से 8 बजे के बीच घर-घर जाकर अभिभावकों को प्रेरित करें।
रैलियां और सांस्कृतिक कार्यक्रम: स्कूलों में प्रभात फेरियां निकाली जा रही हैं ताकि गांव और मोहल्लों में शिक्षा की अलख जगाई जा सके।
जनप्रतिनिधियों की भागीदारी: प्रदेश के सभी जिलों के प्रभारी मंत्री और जिलाधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में इस अभियान का नेतृत्व करेंगे।
काशी से संदेश: "शिक्षित उत्तर प्रदेश, समर्थ उत्तर प्रदेश"
वाराणसी में कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी ने बच्चों को स्कूल बैग और किताबें वितरित कीं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन आ रहा है और 'ऑपरेशन कायाकल्प' के तहत स्कूलों की बुनियादी संरचना को सुधारा गया है।




