Prabhat Vaibhav,Digital Desk : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार ने अपने मौजूदा कार्यकाल का पांचवां और अंतिम पूर्ण बजट पेश कर दिया है। इसे केवल एक वित्तीय दस्तावेज कहना गलत होगा; असल में यह 'मिशन 2027' (अगला विधानसभा चुनाव) को फतह करने के लिए तैयार किया गया एक रणनीतिक मास्टरप्लान है।
इस बजट की सबसे बड़ी खूबी यह है कि सरकार ने 'रेवड़ी संस्कृति' या केवल लोकलुभावन वादों के जाल में फंसने के बजाय पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) और आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता दी है।
बजट 2026-27 के मुख्य स्तंभ: मिशन 2027 की रणनीति
1. पूंजीगत मद में ऐतिहासिक उछाल (इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर)
सरकार ने इस बार राज्य के बुनियादी ढांचे (सड़क, पुल, भवन) के लिए 'तिजोरी' खोल दी है।
आंकड़े: वर्ष 2025-26 में पूंजीगत मद में 14,763.13 करोड़ रुपये रखे गए थे, जिसे अब सीधे बढ़ाकर 18,152.73 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
रणनीति: 3,389 करोड़ रुपये की यह भारी वृद्धि बताती है कि सरकार चुनाव से पहले राज्य में विकास कार्यों की 'रफ्तार' को थामना नहीं चाहती।
2. सामाजिक सुरक्षा: वंचितों को संबल
धामी सरकार ने लगातार तीसरे वर्ष सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के बजट में वृद्धि की है।
बजट: पिछले वर्ष के 918.92 करोड़ की तुलना में इस बार 1327.73 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
कल्याण: सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिए अलग से 400 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान किया गया है, ताकि समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक सरकार की पहुंच सुनिश्चित हो सके।
3. लक्षित समूह: गरीब, युवा, किसान और मातृशक्ति
बजट में GYAN (G-गरीब, Y-युवा, A-अन्नदाता/किसान, N-नारीशक्ति) मॉडल को केंद्र में रखा गया है।
ग्रामीण विकास: गांव और शहर की जरूरतों के बीच संतुलन बैठाने के लिए वित्तीय अनुशासन के साथ-साथ केंद्र से मिल रहे 'डबल इंजन' के वित्तीय समर्थन का भरपूर उपयोग किया गया है।
वित्तीय अनुशासन और 'डबल इंजन' का दम
लेखक रविंद्र बड़थ्वाल के अनुसार, इस बजट में सरकार का आत्मविश्वास साफ झलकता है।
सीमित संसाधन: कभी संसाधनों की कमी का रोना रोने वाले राज्य के पास अब केंद्र सरकार का मजबूत वित्तीय आधार है।
सुधारात्मक उपाय: सरकार ने लोकलुभावन घोषणाओं से बचते हुए सुधारात्मक आर्थिक नीतियों पर ध्यान दिया है, ताकि राज्य की आर्थिकी को स्थायी रूप से मजबूत किया जा सके।




