Prabhat Vaibhav,Digital Desk : उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों के लिए 'पलायन' एक नासूर की तरह रहा है, जिससे अब तक 1,726 गांव पूरी तरह निर्जन (भूतिया गांव) हो चुके हैं। लेकिन वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट इस तस्वीर को बदलने की एक ठोस उम्मीद लेकर आया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने इस बार केवल पलायन रोकने पर ही नहीं, बल्कि प्रवासियों को वापस अपनी जड़ों की ओर लाने के लिए एक 'मजबूत नींव' तैयार की है।
पलायन की वर्तमान स्थिति: एक नजर में
पलायन निवारण आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में निर्जन गांवों की बढ़ती संख्या चिंता का विषय है। लोग मुख्य रूप से बेहतर शिक्षा, आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं और स्थायी रोजगार की तलाश में पहाड़ छोड़ रहे हैं। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में लगभग 8,000 प्रवासी वापस लौटकर अपने गांवों में स्वरोजगार से जुड़े हैं, जो एक सकारात्मक बदलाव का संकेत है।
बजट 2026-27: प्रवासियों के लिए क्या है खास?
सरकार ने इस बजट में उन 'बुनियादी कड़ियों' को जोड़ने का प्रयास किया है, जिनकी कमी से पलायन होता है:
1. 'हाउस ऑफ हिमालयाज' और स्थानीय उत्पाद
स्थानीय उत्पादों (जैसे मंडुआ, झंगोरा, पहाड़ी दालें) को वैश्विक पहचान दिलाने और ब्रांडिंग के लिए 'हाउस ऑफ हिमालयाज' परियोजना को विस्तार दिया गया है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में सीधे रोजगार सृजित होंगे और बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी।
2. पर्यटन और साहसिक खेल (Adventure Tourism)
पहाड़ों की ढलानों को केवल खेती तक सीमित न रखकर उन्हें पर्यटन के केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।
होमस्टे योजना: प्रवासियों को अपने पुराने घरों को 'होमस्टे' में बदलने के लिए सब्सिडी और तकनीकी सहायता दी जाएगी।
साहसिक पर्यटन: ट्रैकिंग, रिवर राफ्टिंग और पैराग्लाइडिंग जैसे क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण और आर्थिक मदद का प्रावधान है।
3. सीमावर्ती गांवों (Vibrant Villages) का विकास
चीन और नेपाल सीमा से लगे गांवों को 'वाइब्रेंट विलेज' योजना के तहत विशेष बजट दिया गया है। यहाँ सड़क, इंटरनेट और बिजली जैसी सुविधाओं को प्राथमिकता दी जा रही है ताकि सीमावर्ती क्षेत्रों से पलायन रुके, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है।
स्वास्थ्य और शिक्षा पर 'सर्जिकल स्ट्राइक'
पहाड़ों में पलायन का सबसे बड़ा कारण स्वास्थ्य और शिक्षा का अभाव है। बजट में इसके लिए निम्नलिखित कदम उठाए गए हैं:
प्रत्येक जिले में मेडिकल कॉलेज: पर्वतीय जिलों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए मेडिकल कॉलेजों और टेली-मेडिसिन सेवाओं पर निवेश।
आदर्श स्कूल: गांवों में उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए 'पीएम श्री' और 'अटल उत्कृष्ट' विद्यालयों का विस्तार।




