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फ्रीडम फाइटर वीर सावरकर के पोते रंजीत सावरकर ने कहा कि कांग्रेस के दिग्गज नेता राहुल गांधी उनके दादाजी पर फार्जी इल्जाम लगा रहे हैं। सावरकर के पोते ने कहा कि इसी तरह के लेटर उस वक्त महात्मा गांधी व जवाहर लाल नेहरु ने भी लिखे थे। रंजीत सावरकर ने महात्मा गांधी और जवाहर लाल नेहरु पर हिंदुस्तान के विभाजन का भी इल्जाम लगाया है।

चर्चा का विषय बने रंजीत सावरकर ने बीते कल को पत्रकारों को बताया कि सावरकर के लेटर की आखिरी लाइनों को राहुल गांधी ने दिखाया जबकि मूलरूप से उस वक्त लिखने का तरीका यही था। उनके दादा व महात्मा गांधी ने भी यही लिखा था, इसका क्या मतलब है। यही नहीं, जवाहरलाल नेहरू अपनी वाइफ एडविना माउंटबेटन के साथ तत्कालीन वायसराय माउंटबेटन के साथ शिमला गए और फिर भारत की आजादी के सिलसिले में विभाजन को मंजूरी दी।

रंजीत सावरकर ने किया सवाल

रंजीत ने यह भी सवाल किया कि क्या यह देशद्रोह नहीं था। उन्होंने एडविना माउंटबेटन तथा नेहरू के बीच रिश्तों के बारे में माउंटबेटन की बेटी पामेला द्वारा लिखी गई एक बुक का भी उल्लेख किया। सावरकर ने इस मौके पर यह भी कहा कि हिंदुस्तान को मांग करनी चाहिए कि एडविना माउंटबेटन के लेटर को लोगों में आम किया जाए।

सावरकर के पोते ने कहा कि नेहरू रोज रात एडविना माउंटबेटन को लेटर भेजकर दिन की घटनाओं और फैसलों के बारे में बताते थे कि क्या यह देशद्रोह नहीं है, पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल को भी इसके बारे में पता होना चाहिए। यही नहीं राहुल गांधी को इस बात की भी खबर होनी चाहिए कि नेहरू ने माउंटबेटन को लेटर के जरिए 1952 तक फैसले लेने के लिए कहा था। उन्होंने इस इल्जाम को भी खारिज कर दिया कि फ्रीडम फाइटर सावरकर को पेंशन दी जा रही थी, उन्होंने कहा कि यह निर्वाह भत्ता था और यह बहुत कम था, उन्होंने कुछ सरकारी आंकड़े भी प्रस्तुत किए। महात्मा गांधी, नेहरू जैसे कई बड़े नेताओं को भी इसी प्रकार का भत्ता बड़े स्तर पर मिल रहा था।