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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : चारधाम यात्रा की तैयारियों के तहत बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने से जुड़ी अहम धार्मिक प्रक्रिया गाड़ू घड़ा (तेल कलश) शोभायात्रा को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। कपाट खुलने की तिथि तय होने के साथ ही डिमरी समुदाय के पुजारियों ने इस पारंपरिक यात्रा की औपचारिक शुरुआत कर दी है।

सात अप्रैल को नरेंद्र नगर से रवाना होगा गाड़ू घड़ा

परंपरा के अनुसार गाड़ू घड़ा तेल कलश सात अप्रैल को टिहरी राजदरबार नरेंद्र नगर से डिमरी समुदाय के पुजारियों द्वारा बदरीनाथ धाम के लिए लाया जाएगा। यह यात्रा बदरीनाथ मंदिर की वार्षिक पूजा-अर्चना से जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में से एक मानी जाती है।

ज्योतिर्मठ के आचार्य को भेजा गया विशेष निमंत्रण

डिमरी समुदाय के पुजारियों ने आठ अप्रैल को ऋषिकेश से बदरीनाथ धाम के लिए प्रस्थान करने वाली गाड़ू घड़ा कलश यात्रा में शामिल होने के लिए ज्योतिर्मठ के आचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को विधिवत निमंत्रण भेजा है।

श्री बदरीनाथ डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत के अध्यक्ष आशुतोष डिमरी ने बताया कि इस पावन अवसर पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की उपस्थिति के लिए बुलावा भेजा गया है। उन्होंने बताया कि बुलावा पत्र लेकर वे स्वयं काशी के लिए रवाना हो चुके हैं।

तय कार्यक्रम के अनुसार चलेगी यात्रा

जानकारी के अनुसार गाड़ू घड़ा कलश यात्रा प्रथम चरण में आठ अप्रैल को ऋषिकेश पहुंचेगी। इसके बाद नौ अप्रैल को श्रीनगर और 10 अप्रैल को डिमरी समुदाय के मूल गांव लक्ष्मी नारायण मंदिर डिम्मर पहुंचेगी। यहां विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद गाड़ू घड़ा को लक्ष्मी नारायण मंदिर के गर्भगृह में स्थापित किया जाएगा।

द्वितीय चरण में 19 अप्रैल को विशेष पूजा-अर्चना के बाद गाड़ू घड़ा डिम्मर गांव से बदरीनाथ धाम के लिए प्रस्थान करेगा।

गाड़ू घड़ा का धार्मिक महत्व

गाड़ू घड़े में तिलों का शुद्ध तेल पिरोकर भरा जाता है। इस तेल को टिहरी राजदरबार नरेंद्र नगर में विधिवत पूजा-अर्चना के साथ महारानी और सुहागन महिलाओं द्वारा तैयार किया जाता है।

कपाट खुलने के बाद इसी पवित्र तिल तेल से भगवान बदरी नारायण का प्रतिदिन अभिषेक किया जाता है। कपाट खुलते ही यह तेल कलश बदरीनाथ मंदिर के गर्भगृह में स्थापित कर दिया जाता है, जिसे अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है।