Prabhat Vaibhav,Digital Desk : धर्मनगरी हरिद्वार में वर्ष 2027 में आयोजित होने वाले अर्धकुंभ मेले को ऐतिहासिक बनाने के लिए उत्तराखंड सरकार ने कमर कस ली है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को हरिद्वार के मेला नियंत्रण भवन (CCR) में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस बार का अर्धकुंभ न केवल आस्था का संगम होगा, बल्कि आधुनिक सुविधाओं और अभेद्य सुरक्षा का एक नया मानक भी स्थापित करेगा।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता
मुख्यमंत्री धामी ने अधिकारियों को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि अर्धकुंभ मेले के दौरान देश-विदेश से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए सुविधा, सुगमता और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा, "हमारा लक्ष्य अर्धकुंभ को इतना दिव्य और भव्य बनाना है कि यह विश्व स्तर पर एक मिसाल बने।"
अक्टूबर तक हर हाल में पूरे होंगे निर्माण कार्य
समयबद्धता पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को 'डेडलाइन' तय कर दी है। बैठक के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
डेडलाइन: अर्धकुंभ से संबंधित सभी स्थायी और अस्थायी कार्यों को अक्टूबर 2026 तक पूर्ण करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।
क्वालिटी चेक: निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए थर्ड पार्टी ऑडिट (Third Party Audit) कराया जाएगा।
जोन और सेक्टर: पूरे मेला क्षेत्र को अलग-अलग जोन और सेक्टरों में बांटकर निगरानी की जाएगी, ताकि भीड़ नियंत्रण में कोई समस्या न आए।
अस्थायी कार्यों को मिली हरी झंडी
मुख्यमंत्री ने बताया कि मेले के लिए प्रमुख स्थायी निर्माण कार्यों को पहले ही स्वीकृति मिल चुकी है। अब अस्थायी निर्माण कार्यों (जैसे टेंट सिटी, घाटों की मरम्मत और अस्थायी पुल) के प्रस्तावों को भी अंतिम रूप देकर उन पर काम शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि विभाग आपसी समन्वय (Coordination) के साथ काम करें ताकि संसाधनों की बर्बादी न हो और कार्य समय पर संपन्न हों।
ऐतिहासिक होगा 2027 का अर्धकुंभ
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि 2027 का अर्धकुंभ उत्तराखंड की धार्मिक पर्यटन क्षमता को दुनिया के सामने प्रदर्शित करने का एक बड़ा अवसर है। सरकार इसके लिए बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को मजबूत करने के साथ-साथ डिजिटल तकनीक का भी भरपूर इस्तेमाल करेगी ताकि श्रद्धालुओं को रियल-टाइम सूचनाएं मिल सकें।




