Prabhat Vaibhav,Digital Desk : अक्सर कानूनी पचड़ों के नाम से ही आम आदमी सहम जाता है। वकील की भारी-भरकम फीस और अदालतों की लंबी तारीखें लोगों को इंसाफ मांगने से रोक देती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत सरकार की एक ऐसी खास योजना है जिसमें आपको एक रुपया भी खर्च नहीं करना पड़ेगा और सीधे बड़े वकीलों से फोन पर सलाह मिल जाएगी? जी हां, 'टेली-लॉ' (Tele-Law) सेवा अब हर भारतीय के लिए वरदान साबित हो रही है।
क्या है टेली-लॉ सेवा और यह कैसे करती है काम?
टेली-लॉ भारत सरकार के न्याय विभाग की एक क्रांतिकारी डिजिटल पहल है, जिसकी शुरुआत 2017 में की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य 'मुकदमे से पहले कानूनी सलाह' (Pre-Litigation Advice) देना है। सरल शब्दों में कहें तो विवाद को अदालत पहुंचने से पहले ही कानूनी रूप से सुलझाने की कोशिश करना। यह सेवा विशेष रूप से उन लोगों के लिए डिजाइन की गई है जो दूर-दराज के गांवों में रहते हैं या आर्थिक रूप से सक्षम नहीं हैं।
सीधे वकील से होगी बात: न दफ्तर जाने की टेंशन, न कतार का झंझट
इस सेवा के तहत आपको कहीं जाने की जरूरत नहीं है। आप वीडियो कॉल या टेलीफोन के जरिए सीधे सरकार द्वारा नियुक्त पैनल वकीलों से जुड़ सकते हैं।
कॉमन सर्विस सेंटर (CSC): आप अपने नजदीकी गांव या पंचायत में स्थित सीएससी सेंटर पर जाकर इस सेवा का लाभ उठा सकते हैं। वहां मौजूद 'विलेज लेवल एंटरप्रेन्योर' (VLE) आपका पंजीकरण करने में मदद करेंगे।
मोबाइल ऐप: अगर आपके पास स्मार्टफोन है, तो आप 'Tele-Law' मोबाइल ऐप डाउनलोड करके खुद को रजिस्टर कर सकते हैं।
20 मिनट की विशेषज्ञ सलाह: पंजीकरण के बाद, एक तय समय पर वकील आपको कॉल करेंगे और लगभग 20 मिनट तक आपकी समस्या सुनकर कानूनी मार्गदर्शन देंगे।
किन मामलों में मिल सकती है मदद?
अक्सर लोग कंफ्यूज रहते हैं कि वे किन मुद्दों पर सलाह ले सकते हैं। टेली-लॉ सेवा के दायरे में ये प्रमुख मामले आते हैं:
पारिवारिक मुद्दे: दहेज, तलाक, घरेलू हिंसा और भरण-पोषण।
जमीन-जायदाद: संपत्ति विवाद और उत्तराधिकार के मामले।
रोजगार: वेतन संबंधी विवाद या कार्यस्थल पर उत्पीड़न।
अधिकार और सुरक्षा: एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया, अनुसूचित जाति/जनजाति पर अत्याचार और मौलिक अधिकार।
महिला एवं बाल अधिकार: बच्चों के संरक्षण और महिलाओं के कानूनी अधिकारों से जुड़ी जानकारी।
सबसे बड़ी बात: अब सबके लिए बिल्कुल मुफ्त
पहले इस सेवा के लिए एक मामूली शुल्क लिया जाता था, लेकिन सरकार ने अब इसे पूरी तरह से निःशुल्क (Free of Cost) कर दिया है। अब देश का कोई भी नागरिक, चाहे उसकी आय कितनी भी हो, विशेषज्ञ वकीलों से मुफ्त कानूनी मशविरा ले सकता है। यह कदम 'सबको न्याय' सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है।




