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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बुधवार को केंद्र की BJP नेतृत्व वाली सरकार पर सीधे हमले करते हुए कहा कि मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) में सुधारों के नाम पर जनता को गुमराह किया जा रहा है।

बकाया राशि से भाजपा के दावों की पोल खुली

वित्त मंत्री ने बताया कि 23,000 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया केंद्र सरकार के दावों की असलियत सामने लाता है। इसमें मजदूरों की 12,219 करोड़ रुपये की अवैतनिक मजदूरी और पंचायतों के ग्रामीण विकास प्रोजेक्ट्स के लिए 11,227 करोड़ रुपये शामिल हैं।

चीमा ने कहा कि भाजपा द्वारा पेश किए जा रहे ‘सुधार’ वास्तविकता में रोज़गार गारंटी को कमजोर करने और संघीय ढांचे पर हमला करने की कोशिश हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बजट का लगभग 27 प्रतिशत हिस्सा 2025-26 में जारी नहीं किया गया, जिससे लाखों परिवार भूखमरी और निराशा का सामना कर रहे हैं।

केंद्र के सुधारों पर तीखी आलोचना

हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित नए फ्रेमवर्क में:

वित्तीय बोझ का 40 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकारों पर डाला गया है।

प्रोजेक्ट्स की मंज़ूरी के लिए केंद्र से पहले अनुमति लेना आवश्यक है।

मोबाइल-लोकेशन-आधारित हाजिरी जैसी नई पाबंदियाँ मजदूरों को बाहर करने का तरीका हैं।

मंत्री ने कहा कि इन कदमों से मनरेगा का अधिकार-आधारित स्वरूप कमजोर हो गया है और गरीब, दलित और छोटे किसानों के अधिकारों पर असर पड़ रहा है।

कांग्रेस की चुप्पी पर सवाल

हरपाल सिंह चीमा ने कांग्रेस शासित राज्यों की चुप्पी पर सवाल उठाया और कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की पंजाब सरकार ने विधानसभा में इस दमनकारी नीति के खिलाफ औपचारिक प्रस्ताव पास करके मजदूरों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई।

वित्त मंत्री ने जोर देकर कहा कि मनरेगा को असली अधिकार-आधारित रूप में तुरंत बहाल किया जाए और सभी बकाया राशि जारी की जाए, ताकि गरीबों की जीवन रक्षा और सम्मान सुनिश्चित हो सके।