Prabhat Vaibhav,Digital Desk : हिंदी साहित्य के प्रतिष्ठित लेखक और पत्रकार कैलाश चंद्र पंत को उनकी छह दशकों की सेवा और योगदान के लिए पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनके पैतृक गांव खंतोली में पुरस्कार की घोषणा के बाद खुशी और उत्सव का माहौल बन गया।
साहित्य और शिक्षा में अमूल्य योगदान
कैलाश चंद्र पंत का जन्म 26 अप्रैल 1936 को महू, इंदौर में हुआ। परिवार लगभग 50 वर्ष पूर्व रोजगार के सिलसिले में मध्य प्रदेश चला गया। पंत ने छह दशकों से अधिक समय तक अध्यापन, लेखन, संपादन और साहित्यिक संगठनात्मक कार्यों के माध्यम से हिंदी साहित्य को समृद्ध किया। उन्हें साहित्याचार्य और साहित्य रत्न की उपाधियां भी प्राप्त हैं।
महत्वपूर्ण पद और कार्य
पंत ने यूनियन थियोलाजिकल सेमिनरी, इंदौर में व्याख्याता, पंचायत राज प्रशिक्षण केंद्र, भोपाल में प्राचार्य और विद्या भवन, उदयपुर में प्रकाशन प्रमुख के रूप में सेवाएं दीं। दैनिक इंदौर समाचार के संवाददाता के रूप में भी उनका योगदान रहा।
साहित्य संपादन और लेखन
उन्होंने शिक्षा प्रदीप, जनधर्म, दुरगामी आह्वान जैसी पत्रिकाओं का संपादन किया और 2003 से द्वैमासिक पत्रिका अक्षरा का संपादन कर रहे हैं। अब तक उनके लगभग 800 लेख विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं।
प्रमुख कृतियां और सामाजिक कार्य
कैलाश पंत की प्रमुख पुस्तकों में ‘कौन किसका आदमी’, ‘धुंध के आर-पार’, ‘शब्द का विचार-पथ’, ‘शैलेश मटियानी: सृजन यात्रा’ शामिल हैं। उन्होंने हिंदी भवन में व्याख्यान मालाओं की परंपरा को सशक्त किया और अनेक संस्थाओं में संस्थापक, सचिव, उपाध्यक्ष और संरक्षक जैसे दायित्व निभाए।
अंतरराष्ट्रीय पहचान
पंत ने फिलीपींस, नेपाल, इजराइल, इंडोनेशिया सहित कई देशों में भारत का प्रतिनिधित्व किया और विश्व हिंदी सम्मेलनों में सक्रिय भागीदारी निभाई। उन्हें साहित्य भूषण सम्मान, निराला साहित्य सम्मान, साहित्य शिरोमणि सम्मान, संस्कृति गौरव सम्मान सहित कई पुरस्कार मिल चुके हैं।
पैतृक गांव में खुशी का माहौल
पद्म श्री की घोषणा के बाद खंतोली गांव और विजयपुर कस्बे में जश्न का माहौल बन गया। ग्रामीणों ने मिठाई वितरण कर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की। ग्रामीणों ने बताया कि भले ही उनका जीवन और कार्यक्षेत्र मध्य प्रदेश में रहा, लेकिन उनकी जड़ें बागेश्वर जिले के खंतोली से जुड़ी हैं।




