Share Market: कच्चा तेल और खराब नतीजों ने बिगाड़ा बाजार का मूड, खुलते ही 600 अंक क्रैश हुआ सेंसेक्स!

Share Market: कच्चा तेल और खराब नतीजों ने बिगाड़ा बाजार का मूड, खुलते ही 600 अंक क्रैश हुआ सेंसेक्स!

हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार (Indian Share Market) की शुरुआत बेहद निराशाजनक और बिकवाली के भारी दबाव के साथ हुई। वैश्विक बाजारों से मिल रहे कमजोर संकेतों, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आई भारी तेजी और घरेलू कंपनियों के उम्मीद से खराब तिमाही नतीजों (Q1 Results) ने दलाल स्ट्रीट का मूड पूरी तरह बिगाड़ दिया। बाजार खुलते ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक सेंसेक्स (BSE Sensex) करीब 600 अंक से ज्यादा नीचे लुढ़क गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी (NSE Nifty) भी 180 अंकों की भारी गिरावट के साथ लाल निशान में कारोबार करता नजर आया। इस अचानक आई गिरावट से निवेशकों के करोड़ों रुपये पल भर में स्वाहा हो गए।

खुलते ही बिखरे दिग्गज शेयर्स: आईटी और बैंकिंग सेक्टर्स पर सबसे ज्यादा मार

बाजार की शुरुआत होते ही चौतरफा बिकवाली का माहौल देखने को मिला। निफ्टी के 50 शेयर्स में से करीब 42 शेयर्स लाल निशान में खुले। सबसे ज्यादा गिरावट आईटी (IT), बैंकिंग (Banking), और ऑटो सेक्टर के शेयरों में दर्ज की गई। रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक, टीसीएस और इंफोसिस जैसे बड़े हैवीवेट शेयर्स के गिरने से बाजार का सेंटिमेंट पूरी तरह निगेटिव हो गया। हालांकि, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच कुछ चुनिंदा ऑयल मार्केटिंग और रिफाइनरी कंपनियों के शेयरों में मामूली खरीदारी जरूर देखी गई, लेकिन वह बाजार को संभालने के लिए नाकाफी साबित हुई।

बाजार में मची इस बड़ी भगदड़ के पीछे के 3 मुख्य विलेन

मार्केट एक्सपर्ट्स और रक्षा विश्लेषकों के मुताबिक, आज बाजार के इस तरह क्रैश होने के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण जिम्मेदार हैं, जिन्होंने निवेशकों को डरा दिया है:

 

1.कच्चे तेल में लगी आग:विलेन 1.

मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच जारी टकराव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें आसमान छू रही हैं। भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा तेल आयात करता है, इसलिए महंगा तेल भारतीय अर्थव्यवस्था और रुपए के लिए बड़ा खतरा है।

2.कंपनियों के खराब तिमाही नतीजे:विलेन 2.

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (Q1) के जो नतीजे सामने आ रहे हैं, वे बाजार की उम्मीदों के मुताबिक नहीं हैं। कई बड़ी दिग्गज कंपनियों के मुनाफे और मार्जिन में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय बाजार से अपना पैसा निकालना शुरू कर दिया है।

3.ग्लोबल मार्केट्स से मिले घाव:विलेन 3.

अमेरिकी बाजारों (Wall Street) में पिछले सत्र में देखी गई भारी गिरावट और एशियाई बाजारों (जैसे निक्केई और हैंगसेंग) के लाल निशान में खुलने का सीधा असर भारतीय बाजार के सेंटिमेंट पर पड़ा। वैश्विक मंदी की आहट ने आग में घी का काम किया है।

 

निवेशकों के लिए क्या है एक्सपर्ट्स की सलाह?

बाजार के मौजूदा हालातों को देखते हुए दिग्गजों का कहना है कि रिटेल निवेशकों को इस समय घबराकर पैनिक सेलिंग (Panic Selling) यानी जल्दबाजी में घाटा उठाकर शेयर बेचने से बचना चाहिए। बाजार में अभी कुछ दिनों तक अस्थिरता (Volatility) बनी रह सकती है। ऐसे में किसी भी नए और बड़े निवेश से बचें। लंबी अवधि के निवेशक इस गिरावट को एक अवसर की तरह देख सकते हैं और मजबूत फंडामेंटल वाले शेयर्स को धीरे-धीरे अपने पोर्टफोलियो में शामिल (Accumulate) कर सकते हैं।

 

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