बेटे की लाचारी ने बनाया 'साइंटिस्ट'! राजस्थान की इस मां के जज्बे को सलाम, राष्ट्रपति भवन से आया बुलावा
दुनिया में मां की ममता से बड़ा और शक्तिशाली कोई आविष्कार नहीं होता, इस बात को राजस्थान की एक साधारण सी दिखने वाली महिला ने सच साबित कर दिखाया है। अपने दिव्यांग (Disabled) बेटे की लाचारी और उसकी दैनिक जरूरतों को पूरा करने की छटपटाहट ने एक मां को ऐसा 'साइंटिस्ट' (इनोवेटर) बना दिया कि आज पूरा देश उनके सामने नतमस्तक है। ग्रामीण परिवेश से आने वाली इस मां के इसी हैरतअंगेज जज्बे और उनके अनोखे स्वदेशी आविष्कार की गूंज अब देश के सबसे बड़े सियासी और ऐतिहासिक गलियारे तक पहुंच गई है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कार्यालय की ओर से उन्हें 'नेशनल इनोवेशन अवॉर्ड' के लिए सीधे राष्ट्रपति भवन (Rashtrapati Bhavan) आने का न्योता भेजा गया है।
जब बेटे का दर्द मां के लिए बन गया सबसे बड़ी प्रेरणा
राजस्थान के एक छोटे से गांव में रहने वाली इस मां का बेटा जन्म से ही शारीरिक रूप से पूरी तरह लाचार था, जिससे वह अपने दैनिक कार्यों और उठने-बैठने के लिए पूरी तरह दूसरों पर निर्भर था। आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण वे महंगे विदेशी मेडिकल उपकरण या व्हीलचेयर खरीदने में असमर्थ थे। हर दिन बेटे को इस तकलीफ में तड़पता देख मां ने हिम्मत नहीं हारी। बिना किसी वैज्ञानिक ट्रेनिंग या इंजीनियरिंग की डिग्री के, उन्होंने घर में पड़े कबाड़, साइकिल के पुर्जों और स्थानीय संसाधनों का उपयोग करके एक ऐसी अनूठी और बेहद सस्ती 'मल्टी-फंक्शनल कस्टमाइज्ड व्हीलचेयर' तैयार कर दी, जिसने उनके बेटे की जिंदगी को काफी हद तक आसान बना दिया।
इस स्वदेशी आविष्कार के 3 सबसे बेहतरीन और अनूठे फीचर्स
इस ग्रामीण मां द्वारा बनाई गई यह मशीन या व्हीलचेयर बाजार में मिलने वाले महंगे उपकरणों से भी ज्यादा कारगर साबित हो रही है, जिसके मुख्य फीचर्स इस प्रकार हैं:
1.लो-कॉस्ट और कबाड़ से निर्माण:फीचर 1.
इस पूरे उपकरण को बनाने में केवल स्थानीय स्तर पर मिलने वाले स्क्रैप (कबाड़) और पुरानी साइकिल के गियर व चेन का इस्तेमाल किया गया है, जिससे इसकी लागत आम व्हीलचेयर से आधी से भी कम है।
2.मल्टी-पोस्चर एडजस्टमेंट सिस्टम:फीचर 2.
यह व्हीलचेयर जरूरत पड़ने पर पूरी तरह से एक फ्लैट बेड (बिस्तर) में तब्दील हो जाती है, जिससे दिव्यांग बच्चे को बिना किसी दर्द या सहारे के लेटाया, बिठाया और आसानी से कहीं भी ले जाया जा सकता है।
3.सहज और सुरक्षित कंट्रोल:फीचर 3.
इसे इस तरह से डिजाइन किया गया है कि बहुत ही कम शारीरिक ताकत लगाने वाली मां भी इसे बिना किसी भारी मशक्कत के आसानी से हैंडल और फोल्ड कर सकती है।
राष्ट्रपति भवन में मिलेगा राष्ट्रीय सम्मान, गांव में जश्न का माहौल
इस अद्भुत आविष्कार की जानकारी जब नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन (NIF) और विज्ञान मंत्रालय तक पहुंची, तो वैज्ञानिक भी इस मां की सूझबूझ को देखकर हैरान रह गए। सरकार ने इसे ग्रासरूट लेवल (जमीनी स्तर) का एक बेहतरीन इनोवेशन माना है। अब राष्ट्रपति भवन से बुलावा आने के बाद पूरे राजस्थान और उनके जिले में जश्न का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल एक आविष्कार नहीं, बल्कि एक मां की ममता की जीत है। यह कहानी देश की करोड़ों उन महिलाओं के लिए एक बड़ी मिसाल है, जो विपरीत परिस्थितियों में भी हार मानने के बजाय अपनी बुद्धिमत्ता से नया रास्ता तैयार करती हैं।