मिशन 2027: उत्तराखंड भाजपा ने कसी कमर, सभी 19 संगठनात्मक जिलों में प्रभारियों की घोषणा; बूथ स्तर तक नेटवर्क मजबूत करने की बड़ी रणनीति

मिशन 2027: उत्तराखंड भाजपा ने कसी कमर, सभी 19 संगठनात्मक जिलों में प्रभारियों की घोषणा; बूथ स्तर तक नेटवर्क मजबूत करने की बड़ी रणनीति

उत्तराखंड में आगामी स्थानीय निकाय चुनावों और साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव (Uttarakhand Assembly Election 2027) के मद्देनजर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सांगठनिक स्तर पर अपनी सक्रियता को शीर्ष पर पहुंचा दिया है। पार्टी ने जमीनी पकड़ और शहरी मतदाताओं पर पकड़ मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए उत्तराखंड के सभी 19 संगठनात्मक जिलों के लिए प्रभारियों (District In-charges) की नियुक्ति कर दी है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों के निर्देश पर जारी इस सूची का मुख्य उद्देश्य 'बूथ से लेकर बाजार और मंडल स्तर तक' पार्टी के नेटवर्क को पूरी तरह सक्रिय और गतिशील बनाना है।

13 प्रशासनिक जिलों के बजाय 19 सांगठनिक जिलों का गणित

उत्तराखंड में सरकारी और प्रशासनिक तौर पर कुल 13 जिले हैं, लेकिन भाजपा ने राज्य की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, दूरदराज के क्षेत्रों और राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए संगठन की दृष्टि से इसे 19 जिलों में विभाजित किया हुआ है। इन 19 सांगठनिक जिलों में देहरादून महानगर, देहरादून ग्रामीण, रुड़की, कोटद्वार, काशीपुर और रानीखेत जैसे प्रमुख आर्थिक व शहरी केंद्र अलग सांगठनिक इकाई के रूप में काम करते हैं। इन सभी केंद्रों पर प्रभारियों की तैनाती कर भाजपा सीधे तौर पर व्यापारियों, शहरी वोट बैंक और स्थानीय निकायों में अपनी पैठ को अभेद्य बनाना चाहती है।

19 संगठनात्मक जिलों के प्रभारियों का प्रभार आवंटन

संगठन को अधिक सक्रिय बनाने के लिए प्रभारियों के बीच जिलों का आवंटन बेहद संतुलित तरीके से किया गया है:

  • आचार्य विपिन जोशी: इन्हें कुमाऊं और गढ़वाल के प्रमुख व्यापारिक व रणनीतिक क्षेत्रों की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिनमें नैनीताल, काशीपुर, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा और कोटद्वार शामिल हैं।

  • घनश्याम शर्मा: शहरी और मैदानी क्षेत्रों में पकड़ मजबूत करने के लिए इन्हें रूड़की, ऊधमसिंह नगर, रानीखेत और देहरादून महानगर का जिम्मा दिया गया है।

  • शेखर श्रीवास्तव: इन्हें पहाड़ी और सीमांत क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों की कमान दी गई है, जिसमें उत्तरकाशी, ऋषिकेश, चम्पावत, बागेश्वर और देहरादून ग्रामीण शामिल हैं।

  • सौरभ रणाकोटी: इनके पास गढ़वाल मंडल के बेहद महत्वपूर्ण पहाड़ी और धार्मिक क्षेत्रों का प्रभार है, जिसमें टिहरी, पौड़ी, चमोली, रुद्रप्रयाग और हरिद्वार संगठनात्मक जिले शामिल हैं।

30 जुलाई तक मंडल संयोजकों की नियुक्ति का अल्टीमेटम

पार्टी आलाकमान ने संगठन विस्तार को लेकर बेहद आक्रामक रुख अपनाया है। सभी नवनियुक्त जिला प्रभारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे आगामी 30 जुलाई तक अपने-अपने प्रभार वाले क्षेत्रों में मंडल स्तर के संयोजकों और समितियों की नियुक्ति की प्रक्रिया को अनिवार्य रूप से पूरा कर लें। इसका सीधा मतलब यह है कि अगस्त महीने की शुरुआत से पहले भाजपा का ब्लॉक और वार्ड स्तर तक का ढांचा चुनावी मोड के लिए पूरी तरह तैयार हो जाएगा।

'बूथ से बाजार तक' क्यों है भाजपा की यह रणनीति खास?

2027 के महामुकाबले से पहले भाजपा का यह सांगठनिक बदलाव कई मायनों में बेहद महत्वपूर्ण है:

  • एंटी-इनकंबेंसी को मात देना: लगातार दो बार से सत्ता में रहने के कारण जमीनी स्तर पर उत्पन्न होने वाले असंतोष को दूर करने के लिए पार्टी नए और ऊर्जावान चेहरों को जिम्मेदारी दे रही है।

  • शहरी और व्यापारी वर्ग को साधना: जीएसटी, स्थानीय टैक्स और मंदी जैसे मुद्दों को लेकर समय-समय पर व्यापारियों की नाराजगी सामने आती रही है। इन प्रकोष्ठों के प्रभारियों के जरिए भाजपा सीधे तौर पर बाजार और व्यापारिक संगठनों से सीधा संवाद स्थापित करेगी।

  • स्थानीय निकाय चुनावों का सेमीफाइनल: विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में होने वाले निकाय चुनाव पार्टी के लिए लिटमस टेस्ट की तरह हैं। इन नियुक्तियों के जरिए टिकट वितरण और स्थानीय स्तर पर समन्वय (Coordination) बिठाना बेहद आसान हो जाएगा।

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