Prabhat Vaibhav,Digital Desk : बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान बुधवार को सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी लेकिन रोचक बहस देखने को मिली। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व उप मुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद उस वक्त असहज हो गए, जब नगर निकाय प्रतिनिधियों के भत्ते को लेकर उनकी ही मांग पर सरकार ने उन्हें आईना दिखा दिया। ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार के एक तीखे सवाल ने सदन का माहौल पूरी तरह बदल दिया।
‘10 साल से नहीं बढ़ा भत्ता’ तारकिशोर ने रखा पक्ष
पूर्व डिप्टी सीएम तारकिशोर प्रसाद ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए सदन में नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों के निर्वाचित प्रतिनिधियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने दलील दी कि जिस तरह त्रिस्तरीय पंचायतों के प्रतिनिधियों का मासिक भत्ता बढ़ाया गया है, उसी तर्ज पर नगर निकायों के प्रतिनिधियों का भी मानदेय बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन प्रतिनिधियों को भी क्षेत्र में भ्रमण करना पड़ता है और पिछले 10 वर्षों से उनके भत्ते में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है।
मंत्री का तंज 'जब आप मंत्री थे, तब याद क्यों नहीं आया?'
सरकार की ओर से जवाब देने खड़े हुए ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने तारकिशोर प्रसाद पर तंज कसते हुए उन्हें उनके पुराने कार्यकाल की याद दिला दी। मंत्री ने कहा, "आप खुद वित्त और नगर विकास मंत्री रहे हैं, उस समय आपको इन प्रतिनिधियों की चिंता क्यों नहीं हुई?" इस एक लाइन के जवाब पर सदन में सन्नाटा छा गया और तारकिशोर प्रसाद कुछ पल के लिए निरुत्तर हो गए। हालांकि, मंत्री ने बाद में नरम रुख अपनाते हुए आश्वासन दिया कि सरकार इस मांग पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी।
कैबिनेट में अटका था प्रस्ताव जीवेश मिश्रा का खुलासा
इसी बहस के बीच भाजपा के जीवेश मिश्रा ने भी मोर्चा संभाला। उन्होंने बताया कि जब वे नगर विकास मंत्री थे, तब विभाग की ओर से भत्ता बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार कर कैबिनेट को भेजा गया था, लेकिन किन्हीं कारणों से उसे मंजूरी नहीं मिल सकी थी। उन्होंने मांग की कि अब समय आ गया है जब सरकार को इस अटके हुए प्रस्ताव पर मुहर लगानी चाहिए।
सदन में 'अंदर की बात' और रिश्तों की चर्चा
नगर निकाय के मुद्दे के अलावा सदन में जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी और गोपालपुर विधायक बुलो मंडल के बीच 'खास रिश्ते' की चर्चा ने भी सबका ध्यान खींचा। विधायक मंडल ने तिनटंगा सड़क के पक्कीकरण की मांग करते हुए कहा कि इस क्षेत्र से मंत्री जी का अलग रिश्ता है। जब अन्य सदस्यों ने इस 'रिश्ते' की गहराई जाननी चाही, तो मंडल ने मुस्कुराते हुए कहा—"यह अंदर की बात है।" जवाब में विजय चौधरी ने भी चुटकी लेते हुए कहा कि रिश्ता अपनी जगह है, लेकिन सरकारी कामकाज रिश्तों से प्रभावित नहीं होता।




