झारखंडवालों सावधान: देवघर और जमशेदपुर समेत 18 जिलों में आज बारिश मचाएगी तांडव
झारखंड के मौसम का मिजाज एक बार फिर से बेहद खतरनाक और डरावना हो गया है, जिसे लेकर मौसम विज्ञान केंद्र ने राज्य के अधिकांश हिस्सों के लिए चेतावनी जारी कर दी है। बादलों की गरज, कड़कती बिजली और तेज हवाओं के साथ होने वाली मूसलाधार बारिश ने आम जनजीवन को पूरी तरह से प्रभावित करने की पूरी तैयारी कर ली है। यदि आप भी देवघर, जमशेदपुर या झारखंड के किसी अन्य जिले में रहते हैं, तो आज का दिन आपके लिए बेहद सावधानी बरतने वाला है। आसमान में छाए काले घने बादलों और लगातार गिरते तापमान के बीच लोगों को अपने घरों में ही रहने की सलाह दी जा रही है। सावन और भादों के इस मौसम में मानसूनी हवाएं एक बार फिर से पूरे शबाब पर हैं, जिसके कारण बादलों का डेरा राज्य के चप्पे-चप्पे पर दिखाई दे रहा है। मौसम विभाग यानी आईएमडी की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, आज का दिन झारखंड के इतिहास में इस हफ्ते का सबसे भारी बारिश वाला दिन साबित हो सकता है, जहां जलभराव और ट्रैफिक जाम जैसी समस्याएं आम नागरिकों के लिए बड़ी मुसीबत बन सकती हैं।
IMD का बड़ा अलर्ट: इन 18 जिलों में गरज-चमकर बरसेंगे बादल
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने रांची स्थित केंद्र से चेतावनी जारी करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि झारखंड के कुल 18 जिलों में आज मौसम का भयंकर रूप देखने को मिलेगा। जिन प्रमुख जिलों पर बादलों की सबसे ज्यादा टेढ़ी नजर है, उनमें देवघर, पूर्वी सिंहभूम यानी जमशेदपुर, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, धनबाद, बोकारो, गिरिडीह, और हजारीबाग शामिल हैं। इसके अलावा रामगढ़, कोडरमा, चतरा, पलामू, गढ़वा, लातेहार, लोहरदगा, गुमला, सिमडेगा और खूंटी में भी गरज-चमक के साथ बादलों के फटने जैसी स्थिति या लगातार मूसलाधार बारिश होने की पूरी संभावना जताई गई है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि एक मजबूत टर्फ लाइन और चक्रवाती परिसंचरण के सक्रिय होने के कारण बादलों को पर्याप्त नमी मिल रही है, जिससे ये इलाके पानी से तरबतर होने वाले हैं। खेतों में काम करने वाले किसानों और सड़क पर सफर करने वाले यात्रियों को विशेष सतर्कता बरतने की हिदायत दी गई है, क्योंकि मौसम का यह तांडव किसी भी समय विकराल रूप ले सकता है।
वज्रपात और बादलों की गर्जना से सहमे लोग, घरों में रहने की अपील
बारिश के साथ-साथ बादलों की गरज और आसमान से गिरने वाली आकाशीय बिजली यानी वज्रपात ने झारखंड के लोगों की नींद उड़ा दी है। पिछले कुछ दिनों में वज्रपात की चपेट में आने से कई अनहोनी घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिसके कारण प्रशासन इस बार किसी भी तरह की लापरवाही बरदाश्त करने के मूड में नहीं है। जिला प्रशासन की ओर से लगातार लाउडस्पीकर और मोबाइल अलर्ट के जरिए लोगों से अपील की जा रही है कि वे खराब मौसम के दौरान पेड़ों के नीचे बिल्कुल न खड़े हों। खेत-खलिहानों में काम कर रहे किसानों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने के लिए कहा गया है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचा जा सके। बिजली के खंभों और ट्रांसफार्मर के आस-पास जाने से बचने की सख्त सलाह दी गई है, क्योंकि तेज बारिश के दौरान शॉर्ट सर्किट और करंट फैलने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। बच्चों और बुजुर्गों को घरों के अंदर ही रखने की सलाह दी गई है ताकि वे इस डरावने मौसम के प्रकोप से पूरी तरह सुरक्षित रह सकें।
देवघर और जमशेदपुर में भारी बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त
बाबा बैद्यनाथ की नगरी देवघर और औद्योगिक शहर जमशेदपुर में आज सुबह से ही आसमान में काले बादलों का भारी जमावड़ा लगा हुआ है, जिसने शहर की रफ्तार को धीमा कर दिया है। देवघर में दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं को भारी बारिश के बीच सड़कों पर जलभराव और कीचड़ का सामना करना पड़ रहा है, जिससे मंदिर मार्ग पर लंबी कतारों के प्रबंधन में भी दिक्कतें आ रही हैं। वहीं दूसरी ओर, टाटा स्टील और अन्य कंपनियों के हब जमशेदपुर में मूसलाधार बारिश के चलते निचले इलाकों और कॉलोनियों में पानी भर जाने से लोगों का घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। ड्रेनेज सिस्टम फेल होने के कारण सड़कों पर जलजमाव की स्थिति पैदा हो गई है, जिससे ऑफिस जाने वाले लोगों और स्कूली बच्चों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय प्रशासन जल निकासी के कार्यों में युद्ध स्तर पर जुट गया है ताकि शहरवासियों को इस आफत की बारिश से जल्द से जल्द राहत दिलाई जा सके।
कृषि और फसल सुरक्षा को लेकर किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें
झारखंड के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले किसानों के लिए यह मानसूनी बारिश जहां एक तरफ धान की फसल के लिए जीवनदान मानी जा रही है, वहीं दूसरी तरफ जरूरत से ज्यादा पानी खेतों में भरने से फसल सड़ने का भी डर सताने लगा है। कई जिलों में लगातार हो रही बारिश के कारण नदी-नाले उफान पर आ चुके हैं, जिससे निचले खेतों में पानी भर गया है और कटी हुई फसलें बर्बाद होने की कगार पर पहुंच गई हैं। कृषि विशेषज्ञों का सुझाव है कि किसान अपने खेतों के जल निकास का उचित प्रबंधन तुरंत करें ताकि अतिरिक्त पानी बाहर निकल सके और फसलों को बचाया जा सके। इसके अलावा मवेशियों को खुले आसमान के नीचे न बांधकर सुरक्षित शेड के भीतर रखने की अपील की गई है ताकि वे ठंड और बारिश की चपेट में न आएं। झारखंड सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग पूरी तरह से मुस्तैद हैं और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए राहत दलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत सहायता पहुंचाई जा सके।