परीक्षा में AI इस्तेमाल कर सकेंगे छात्र? IIM के 78 स्टूडेंट्स ने एआई से दिए पेपर, जानिए नए नियम
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को अक्सर परीक्षाओं में नकल और अनैतिक साधनों के रूप में देखा जाता है, लेकिन देश के शीर्ष प्रबंधन संस्थान आईआईएम बेंगलुरु (IIM Bangalore) ने इस सोच को पूरी तरह बदलकर रख दिया है। भारतीय उच्च शिक्षा इतिहास में पहली बार, आईआईएम बेंगलुरु ने अपने 78 एमबीए (MBA) छात्रों को लिखित परीक्षा के पारंपरिक ढर्रे से अलग एआई चैटबॉट की मदद से मिडटर्म परीक्षा देने की इजाजत दी। इस अनूठे कदम ने शिक्षा जगत, टेक इंडस्ट्री और प्रतियोगी परीक्षा तंत्र में एक नई क्रांति की शुरुआत कर दी है। संस्थान ने जेनरेटिव एआई (Generative AI) को बैन करने के बजाय इसे छात्रों के बौद्धिक विकास और व्यावहारिक कौशल मूल्यांकन का मुख्य आधार बना दिया है, जिससे अब अन्य यूनिवर्सिटीज और बोर्ड्स भी अपनी डिजिटल मूल्यांकन नीतियों पर नए सिरे से विचार करने लगे हैं।
कैसे आयोजित हुई परीक्षा और 78 छात्रों ने एआई से कैसे तैयार किए उत्तर
यह क्रांतिकारी प्रयोग आईआईएम बेंगलुरु के बिजनेस एनालिटिक्स और जनरल एमबीए इलेक्टिव कोर्स के 'जेनरेटिव एआई' विषय के मिडटर्म एग्जाम में किया गया। परीक्षा में शामिल 78 छात्रों को कोई पारंपरिक प्रश्न-पत्र या पेन-पेपर टेस्ट नहीं दिया गया। इसके बजाय, छात्रों ने परीक्षा से एक महीने पहले से ही अपना खुद का एआई चैटबॉट (Custom AI Chatbot) डिजाइन और डेवलप किया। परीक्षा वाले दिन, पर्यवेक्षकों (Supervisors) की देखरेख में छात्रों ने अपने बनाए चैटबॉट का उपयोग करके केस स्टडीज और 15 जटिल प्रश्नों के उत्तर तैयार किए। छात्रों ने चैटबॉट को सही दिशा में निर्देशित करने के लिए सटीक प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग की और कोर्स मटेरियल के डेटा को मॉडल के साथ एकीकृत किया।
कैसे मिला छात्रों को नंबर और मूल्यांकन के क्या हैं नए सख्त नियम
पारंपरिक परीक्षाओं में जहां केवल उत्तरों की शुद्धता और रटने की क्षमता पर अंक दिए जाते हैं, वहीं आईआईएम बेंगलुरु ने मूल्यांकन के बिल्कुल नए मापदंड तय किए हैं। प्रोफेसर्स द्वारा तैयार किए गए विशेष एआई प्लेटफॉर्म पर छात्रों को दो प्रमुख आधारों पर ग्रेड दिए गए: पहला, उन्होंने अपने एआई चैटबॉट के आर्किटेक्चर और डिजाइन में कोर्स के सिद्धांतों का कितनी गहराई से प्रयोग किया है, और दूसरा, उनके चैटबॉट द्वारा उत्पन्न उत्तरों की गुणवत्ता, सटीकता व तार्किकता कितनी बेहतर है। जो छात्र केवल बुनियादी प्रॉम्प्ट पर निर्भर रहे, उन्हें कम अंक मिले, जबकि जिन छात्रों ने फाइन-ट्यूनिंग और डेटा कस्टमाइजेशन के जरिए चैटबॉट से सटीक व्यावसायिक समाधान निकाले, उन्हें शीर्ष ग्रेड हासिल हुए।
हार्वर्ड से लेकर भारतीय संस्थानों तक कैसे बदल रहे हैं एआई सुरक्षा नियम
आईआईएम बेंगलुरु का यह एआई एग्जाम मॉडल पूरी दुनिया के शैक्षणिक संस्थानों के लिए एक नजीर बन चुका है। इससे पहले वैश्विक स्तर पर हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने भी अपने कोर्सवर्क में एआई टूल्स के नियंत्रित इस्तेमाल के लिए गाइडलाइंस में बदलाव किया है। भारत में भी आईआईएम अहमदाबाद (IIM Ahmedabad) केस स्टडीज के इंटरेक्टिव सेशन के लिए एआई का सहारा ले रहा है, जबकि आईआईएसईआर पुणे (IISER Pune) प्रोफेसर्स की अनुमति के बाद असाइनमेंट्स में एआई उपयोग को मान्यता दे रहा है। नए नियमों के तहत अब शैक्षणिक संस्थान एआई के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बजाय 'कंट्रोल्ड यूज' (Supervised AI Use) और 'प्रॉम्प्ट बेस्ड असेसमेंट' की तरफ तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं।
भविष्य की शिक्षा प्रणाली, जॉब मार्केट और एआई दक्षता की उपयोगिता
कॉर्पोरेट जगत और टेक विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में केवल किताबी ज्ञान रखने वाले स्नातकों की तुलना में वे पेशेवर ज्यादा सफल होंगे जो एआई टूल्स का कुशलतापूर्वक संचालन कर सकते हैं। आईआईएम बेंगलुरु के इस कदम ने साबित कर दिया है कि एआई से डरने या इसे रोकने के बजाय इसे सीखने और सिखाने का माध्यम बनाना ही डिजिटल युग की असली जरूरत है। शिक्षा विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले 2 से 3 सालों के भीतर देश के कई प्रमुख इंजीनियरिंग कॉलेज, मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट और सेंट्रल यूनिवर्सिटीज अपने परीक्षा पैटर्न में ओपन-बुक टेस्ट की तर्ज पर एआई-असिस्टेड एग्जाम फॉर्मेट को शामिल कर सकते हैं, जिससे छात्रों की निर्णय लेने की क्षमता और तकनीकी दक्षता में अभूतपूर्व सुधार होगा।