Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पंजाब को नशे के अभिशाप से मुक्त करने के लिए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान द्वारा शुरू की गई 'युद्ध नशों विरुद्ध' मुहिम ने अपना एक वर्ष सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इस ऐतिहासिक अवसर पर मुख्यमंत्री ने पंजाब की जनता को बधाई देते हुए इसे एक सफल 'जन आंदोलन' करार दिया। सीएम मान ने साफ किया कि उनकी सरकार ने न केवल नशे के कारोबार की कमर तोड़ी है, बल्कि पिछली सरकारों के दौरान फलने-फूलने वाले ड्रग नेटवर्क को जड़ से उखाड़ फेंका है।
नशा तस्करों पर सर्जिकल स्ट्राइक: 16.70 करोड़ की ड्रग मनी बरामद
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अभियान की उपलब्धियों का ब्योरा देते हुए बताया कि पिछले एक साल में पुलिस ने नशा तस्करों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। इस दौरान तस्करों से 16.70 करोड़ रुपये की ड्रग मनी बरामद की गई है। सरकार ने न केवल तस्करों को जेल भेजा, बल्कि उनकी करोड़ों रुपये की अवैध संपत्तियों को भी जब्त या ध्वस्त कर दिया है। सीएम ने कहा कि "बड़ी मछलियों" को सलाखों के पीछे भेजकर सप्लाई लाइन को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया है।
आंकड़ों में कार्रवाई: 51 हजार से ज्यादा गिरफ्तारियां और 88% सजा दर
मार्च 2025 से फरवरी 2026 तक की अवधि में पंजाब सरकार की जीरो-टॉलरेंस नीति के तहत चौंकाने वाले परिणाम सामने आए हैं:
एफआईआर: नशा तस्करों के खिलाफ कुल 36,178 मामले दर्ज किए गए।
गिरफ्तारी: रिकॉर्ड 51,648 तस्करों को पुलिस ने दबोचा।
बरामदगी: लगभग 2,277 किलोग्राम हेरोइन और 49 लाख से अधिक नशीली गोलियां/कैप्सूल जब्त किए गए।
सजा की दर (Conviction Rate): बेहतर फॉरेंसिक जांच और मजबूत पैरवी के कारण सजा की दर 88 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो राज्य के इतिहास में एक कीर्तिमान है।
पिछली सरकारों पर साधा निशाना: 'हम लाशों पर राजनीति नहीं करते'
भावुक होते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकारों ने ड्रग माफिया को राजनीतिक संरक्षण दिया, जिससे पंजाब की कई पीढ़ियां बर्बाद हो गई। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "हम नशा पीड़ितों की लाशों और चिताओं की कीमत पर तस्करों को फलने-फूलने नहीं देंगे।" मान सरकार का संकल्प है कि पंजाब के युवाओं के हाथों में नशे के टीके नहीं, बल्कि रोजगार और किताबें हों।
जनता के सहयोग से बना 'जन आंदोलन'
मुख्यमंत्री ने इस सफलता का श्रेय पंजाब की जागरूक जनता को दिया। उन्होंने कहा कि पुलिस और प्रशासन की सख्ती के साथ-साथ जब आम लोग इस मुहिम से जुड़े, तभी यह एक वास्तविक जन आंदोलन बन पाया। उन्होंने राज्य के युवाओं से अपील की कि वे खेलों और सकारात्मक कार्यों की ओर बढ़ें। सरकार नशा मुक्ति केंद्रों के सुदृढ़ीकरण और पुनर्वास पर भी विशेष ध्यान दे रही है ताकि मुख्यधारा से भटके युवाओं को वापस लाया जा सके।




