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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : उत्तर प्रदेश ने महिला एवं बाल विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के तहत छह वर्ष तक के 1.45 करोड़ से अधिक बच्चों में से 98.42% बच्चों को पोषण सेवाओं के लिए सफलतापूर्वक मैप किया गया है। राज्य में कुल 1,89,736 आंगनबाड़ी केंद्र सक्रिय रूप से संचालित हैं, जो जमीनी स्तर पर सेवाएं पहुंचा रहे हैं।

संस्थागत प्रसव में ऐतिहासिक रिकॉर्ड
स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ने का असर यह हुआ है कि प्रदेश में 99.97% गर्भवती महिलाएं अस्पतालों में प्रसव का विकल्प चुन रही हैं। 40,580 स्वास्थ्यकर्मियों की देखरेख में 93 लाख से अधिक लाभार्थियों को मातृ एवं शिशु देखभाल सेवाएं मिली हैं। यह आंकड़ा सुरक्षित मातृत्व की दिशा में बड़ी सफलता माना जा रहा है।

आंगनबाड़ी ढांचे का व्यापक विस्तार
राज्य ने 22,290 मिनी आंगनबाड़ी केंद्रों को नियमित केंद्रों में परिवर्तित कर दिया है। साथ ही 23,697 केंद्रों को सक्षम आंगनबाड़ी के रूप में उन्नत करने की मंजूरी दी गई है, जिससे प्रारंभिक बाल देखभाल और पोषण सेवाएं और मजबूत होंगी।

मिशन शक्ति से लाखों महिलाओं को सहारा
मिशन शक्ति के तहत 96 वन स्टॉप सेंटर संचालित हैं, जिनसे अब तक 2.96 लाख से अधिक महिलाओं को सहायता मिली है। महिला हेल्पलाइन से 9 लाख से ज्यादा महिलाओं को मदद प्रदान की जा चुकी है। आपातकालीन सहायता प्रणाली से जुड़ाव ने सेवाओं को और प्रभावी बनाया है।

मिशन वात्सल्य और बेटी बचाओ का असर
राज्य के सभी 75 जिलों में मिशन वात्सल्य के अंतर्गत 191 चाइल्ड केयर संस्थान संचालित हैं, जहां 5,000 से अधिक बच्चों को संस्थागत देखभाल मिल रही है। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना भी पूरे प्रदेश में लागू है, जिससे बालिकाओं के स्वास्थ्य और शिक्षा पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।

वर्किंग वुमन हॉस्टल और नई पहलें
महिलाओं की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए 4,000 बेड की क्षमता वाले आठ वर्किंग वुमन हॉस्टल को मंजूरी मिली है। इसके लिए 381.56 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसके अलावा शक्ति सदन और सखी निवास जैसी योजनाओं का विस्तार भी किया जा रहा है।

समग्र सुधार की दिशा में आगे बढ़ता प्रदेश
महिला और बाल विकास मंत्रालय के अनुसार, बुनियादी ढांचे और सेवा प्रणाली को मजबूत करने पर विशेष ध्यान देने से राज्य में स्वास्थ्य और पोषण के संकेतकों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। लक्ष्य है कि समाज के अंतिम पायदान तक सेवाएं प्रभावी रूप से पहुंचें।