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 Prabhat Vaibhav,Digital Desk : अंतरराष्ट्रीय राजनीति के रंगमंच पर एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने दुनिया भर के कूटनीतिज्ञों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपनी एक आत्मीय तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की और कैप्शन में लिखा— 'जय हो'। यह महज दो शब्दों का कैप्शन नहीं, बल्कि भारत और फ्रांस के बीच उस प्रगाढ़ होती दोस्ती का संकेत है, जिसे अब दुनिया 'नया रूस' समीकरण के तौर पर देख रही है।

'जय हो' का संदेश: कूटनीति के नए मायने

मुंबई में आयोजित 'भारत-फ्रांस नवाचार मंच' (India-France Innovation Forum) के दौरान मैक्रों का यह अंदाज उनकी व्यक्तिगत केमिस्ट्री को दर्शाता है।

फ्रांस का संकल्प: मैक्रों ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "आज वैश्विक बहस इस पर नहीं है कि भारत नवाचार (Innovation) करता है या नहीं, बल्कि इस पर है कि भारत के साथ नवाचार कौन करना चाहता है? और फ्रांस ही इसका एकमात्र स्पष्ट उत्तर है।"

प्रतिबद्ध साझेदार: उन्होंने भरोसा दिलाया कि फ्रांस हमेशा भारत का एक ऐसा साथी रहेगा जो रक्षा से लेकर तकनीक तक हर मोर्चे पर मजबूती से खड़ा है।

क्या रूस की जगह ले रहा है फ्रांस?

दशकों से रूस भारत का सबसे भरोसेमंद रक्षा और रणनीतिक साझेदार रहा है, लेकिन बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच फ्रांस तेजी से उस खाली जगह को भर रहा है।

बिना शर्त समर्थन: रूस की तरह ही फ्रांस ने भारत के आंतरिक मामलों पर कभी टिप्पणी नहीं की और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हमेशा भारत का साथ दिया है।

रक्षा तकनीक का हस्तांतरण: राफेल विमानों से लेकर पनडुब्बी निर्माण तक, फ्रांस भारत को अपनी सबसे संवेदनशील तकनीक साझा करने में संकोच नहीं कर रहा है।

स्वतंत्र विदेश नीति: भारत और फ्रांस दोनों ही रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) के समर्थक हैं, जो उन्हें एक-दूसरे का स्वाभाविक सहयोगी बनाता है।

पेरिस में मनेगा 'नवाचार दिवस': PM मोदी का सुझाव और मैक्रों की मुहर

मैक्रों ने एक बड़ा एलान करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के सुझाव पर G7 शिखर सम्मेलन से ठीक एक दिन पहले पेरिस में 'नवाचार दिवस' मनाया जाएगा।

भारत-फ्रांस पहल: यह आयोजन दोनों देशों के छात्रों, शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स के लिए एक बड़ा मंच होगा।

नवाचार वर्ष: दोनों नेताओं ने 'भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष' की शुरुआत कर स्वास्थ्य, सुरक्षा और रोजमर्रा की तकनीक में सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया है।

भारतीय मेधा का लोहा: मैक्रों ने गिनाए भारतीय CEO के नाम

मैक्रों ने वैश्विक स्तर पर भारत की तकनीकी धमक की सराहना की। उन्होंने कहा कि आज भारत न केवल नवाचार में भाग ले रहा है, बल्कि उसका नेतृत्व कर रहा है।

CEO की फेहरिस्त: उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट (सत्या नडेला), अल्फाबेट (सुंदर पिचाई), आईबीएम, एडोब और पालो अल्टो नेटवर्क्स जैसी कंपनियों में भारतीय मूल के नेतृत्व का जिक्र करते हुए भारत की इंजीनियरिंग और प्रबंधन क्षमता की तारीफ की।