Prabhat Vaibhav,Digital Desk : मध्य पूर्व (Middle East) में छिड़ी भीषण जंग और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद उपजे हालातों ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आज रात 10 बजे 'कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी' (CCS) की आपातकालीन बैठक बुलाई है। इस उच्च स्तरीय बैठक में युद्धग्रस्त क्षेत्र में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर को लेकर बड़े फैसले लिए जा सकते हैं।
मिडिल ईस्ट में महाजंग: ईरान और इजराइल के बीच आर-पार की लड़ाई
इजराइल और अमेरिका के संयुक्त सैन्य अभियान के बाद ईरान में मचे हाहाकार ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। शनिवार को हुए हवाई हमलों में खामेनेई की मृत्यु की खबरों के बाद ईरान ने इजराइल और खाड़ी देशों पर जवाबी हमले तेज कर दिए हैं। इस संघर्ष ने न केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार में उथल-पुथल मचा दी है, बल्कि भारत के रणनीतिक और आर्थिक हितों के लिए भी बड़ा खतरा पैदा कर दिया है।
बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधु भी फंसीं, रेस्क्यू ऑपरेशन पर चर्चा संभव
भारत सरकार के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय वहां फंसे भारतीय नागरिक हैं। चौंकाने वाली खबर यह है कि भारत की दिग्गज बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु भी इस समय संघर्ष वाले क्षेत्र में फंसी हुई हैं। सूत्रों के अनुसार, CCS की बैठक में विदेश मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय मिलकर भारतीयों को एयरलिफ्ट करने या सुरक्षित समुद्री मार्ग देने की योजना (Operation Homecoming) पर चर्चा करेंगे। दूतावासों को पहले ही हाई अलर्ट पर रखा गया है।
कच्चे तेल की सप्लाई और अर्थव्यवस्था पर मंडराता खतरा
प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री और गृह मंत्री के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) भी शामिल होंगे। बैठक का एक मुख्य एजेंडा कच्चे तेल (Crude Oil) की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना है। चूंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक मध्य पूर्व पर निर्भर है, इसलिए समुद्री मार्गों (Sea Routes) की सुरक्षा और तेल की कीमतों में संभावित उछाल को रोकने के लिए वैकल्पिक रास्तों पर विचार किया जाएगा।
विश्व शांति के लिए भारत की कूटनीतिक पहल
भारत हमेशा से युद्ध के बजाय संवाद का पक्षधर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी इस बैठक में यह भी तय करेंगे कि क्षेत्रीय शांति बहाल करने के लिए भारत वैश्विक मंच पर क्या भूमिका निभा सकता है। भारत के ईरान और इजराइल, दोनों के साथ मजबूत संबंध हैं, ऐसे में नई दिल्ली की कोशिश होगी कि तनाव को कम करने के लिए मध्यस्थता की संभावनाओं को तलाशा जाए।




