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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पंजाब विधानसभा के बजट सत्र में गुरुवार को देश की विदेश नीति (Foreign Policy) को लेकर अभूतपूर्व हंगामा देखने को मिला। सत्तापक्ष के विधायकों ने एक 'निंदा प्रस्ताव' पर चर्चा के दौरान केंद्र सरकार पर तीखे प्रहार किए। आम आदमी पार्टी (AAP) के दिग्गज नेता कुलदीप सिंह धालीवाल ने अंतरराष्ट्रीय संकट के बीच भारत की स्थिति को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए यहां तक कह दिया कि वर्तमान में देश की नीतियां भारत सरकार नहीं बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रभाव में चल रही हैं।

धालीवाल का तीखा वार: "गैस संकट और कमजोर नेतृत्व"

पूर्व मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल ने चर्चा के दौरान आरोप लगाया कि केंद्र की कमजोर विदेश नीति का खामियाजा अब पंजाब के आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है।

रसोई गैस की किल्लत: धालीवाल के अनुसार, चंडीगढ़ और पंजाब के प्रमुख शहरों में घरेलू और कमर्शियल गैस की भारी किल्लत हो गई है।

महंगाई का झटका: घरेलू सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर में 115 रुपये की तत्काल बढ़ोतरी ने आम आदमी और कारोबारियों की कमर तोड़ दी है।

रेस्टोरेंट बंद होने की कगार पर: उन्होंने दावा किया कि गैस की कमी के कारण हजारों रेस्टोरेंट बंद होने की स्थिति में हैं।

व्यापार और उद्योग पर अंतरराष्ट्रीय नीतियों का असर

चर्चा में भाग लेते हुए अन्य विधायकों ने भी आर्थिक मोर्चे पर केंद्र को घेरा:

इस्पात (Steel) उद्योग पर चोट: विधायक गैरी वड़िंग ने बताया कि भारत से बाहर जाने वाले स्टील पर 50% टैक्स लगाने के फैसले से स्थानीय उद्योग तबाह हो सकते हैं।

किसानों पर संकट: वड़िंग ने मक्की (Maize) की खेती का जिक्र करते हुए कहा कि अगर विदेशों से पोल्ट्री उत्पाद बड़ी मात्रा में आयात किए जाते हैं, तो स्थानीय किसानों और पोल्ट्री उद्योग को भारी नुकसान होगा।

टैंकरों का संकट: विधायक विजय सिंगला ने दावा किया कि अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण 248 तेल टैंकर रास्ते में फंसे हुए हैं, जिससे आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल की भारी किल्लत हो सकती है।

ईरान से दोस्ती और संतुलित नीति की मांग

विधायक शैरी कलसी ने भारत की पारंपरिक विदेश नीति का हवाला देते हुए कहा कि ईरान हमेशा से भारत का संकटमोचक मित्र रहा है। उन्होंने मांग की कि भारत को किसी एक देश (अमेरिका) के प्रभाव में आने के बजाय अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखकर 'संतुलित नीति' अपनानी चाहिए।

सत्तापक्ष की मुख्य मांगें:

स्थिति स्पष्ट करे केंद्र: केंद्र सरकार संसद और देश को बताए कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों (ईरान-इजरायल युद्ध) के बीच भारत की वास्तविक रणनीति क्या है।

आपूर्ति बहाल हो: गैस और तेल की आपूर्ति को युद्ध स्तर पर बहाल किया जाए ताकि घरेलू बाजार में महंगाई को रोका जा सके।

उद्योगों की सुरक्षा: स्थानीय इस्पात और कृषि उत्पादों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाने के लिए टैक्स नीतियों पर पुनर्विचार हो।