लापता 'आप' सरपंच की मिली लाश: परिजनों ने पुलिस प्रशासन पर लगाए बेहद गंभीर आरोप

लापता 'आप' सरपंच की मिली लाश: परिजनों ने पुलिस प्रशासन पर लगाए बेहद गंभीर आरोप

देश के विभिन्न राज्यों से आए दिन आने वाली सनसनीखेज और झकझोर देने वाली खबरें कानून-व्यवस्था और पुलिसिया कार्यप्रणाली पर कई बड़े सवाल खड़े कर देती हैं। आम आदमी पार्टी (AAP) से जुड़े एक सक्रिय सरपंच के अचानक लापता होने और उसके बाद उनकी संदिग्‍ध परिस्थितियों में मृत शरीर मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। इस घटना के सामने आने के बाद से ही मृतक के परिवारजनों और स्थानीय ग्रामीणों में पुलिस प्रशासन के खिलाफ भारी गुस्सा और आक्रोश व्याप्त है। परिजनों का आरोप है कि लापता होने के बाद से उनका मोबाइल लगातार 14 घंटे तक ऑन (Active) रहा था, इसके बावजूद स्थानीय पुलिस समय रहते तकनीकी मदद और सर्विलांस का इस्तेमाल करके उनकी जान नहीं बचा सकी। इस विशेष, विस्तृत और इनसाइड रिपोर्ट के माध्यम से हम गहराई से जानेंगे कि इस पूरी घटना की पृष्ठभूमि क्या है, परिजनों ने पुलिस पर कौन-कौन से गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं और इस मामले में आगे क्या कार्रवाई की मांग की जा रही है।

क्या है पूरा मामला? लापता होने के बाद कैसे मिला 'आप' सरपंच का शव और क्यों गरमाया माहौल?

घटना की शुरुआत तब हुई जब आम आदमी पार्टी से जुड़े एक लोकप्रिय सरपंच अचानक अपने घर से संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गए। परिजनों ने जब उनकी काफी तलाश की और वे कहीं नहीं मिले, तो उन्होंने तुरंत स्थानीय पुलिस थाने में उनके गायब होने की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। परिवार वालों को यह उम्मीद थी कि पुलिस उनकी त्वरित कार्रवाई और खोजबीन के जरिए सुरक्षित घर वापस ले आएगी। लेकिन कुछ घंटों की भारी मशक्कत और इंतजार के बाद जब उनका शव एक सुनसान इलाके या संदिग्ध जगह से बरामद हुआ, तो परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई। इस दुखद और भयानक खबर के मिलते ही पूरे गांव में मातम पसर गया और देखते ही देखते सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण और पार्टी कार्यकर्ता थाने व घटनास्थल के बाहर जमा होकर विरोध प्रदर्शन करने लगे। इस दर्दनाक घटना ने स्थानीय प्रशासन की मुस्तैदी और पुलिस के कामकाज के तरीकों पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

परिवार का सनसनीखेज आरोप: 'घटना के बाद 14 घंटे तक ऑन रहा मोबाइल, फिर भी हाथ पर हाथ धरे बैठी रही पुलिस'

इस पूरे मामले में सबसे गंभीर और चौंकाने वाला पहलू परिजनों द्वारा लगाया गया वह आरोप है जिसमें उन्होंने पुलिस की कार्यकुशलता पर सीधा हमला बोला है। परिजनों का रो-रोकर यह कहना है कि जब सरपंच महोदय लापता हुए थे, तब उनका मोबाइल फोन लगातार चालू (On) था और उसमें रिंग भी जा रही थी। परिजनों ने तुरंत इसकी जानकारी स्थानीय पुलिस को देते हुए यह गुहार लगाई थी कि वे तत्काल मोबाइल लोकेशन (Mobile Location Tracking) और सर्विलांस (Surveillance) की मदद से उनकी तलाश करें। लेकिन आरोप है कि पुलिस ने इस तकनीकी सुराग को बेहद हल्के में लिया और समय पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया। यदि पुलिस चाहती और पहले 14 घंटों के दौरान सक्रियता दिखाई होती, तो शायद उनकी जान बचाई जा सकती थी। अपनों को खोने का दर्द झेल रहे परिवार का यह भी आरोप है कि यदि वे खुद अपने स्तर पर खोजबीन करते या पुलिस समय रहते गंभीर होती, तो आज यह दिन नहीं देखना पड़ता।

पुलिस प्रशासन के खिलाफ ग्रामीणों में उबाल: न्याय की मांग को लेकर सड़क पर उतरे लोग

'आप' सरपंच की इस संदिग्‍ध मौत और पुलिस की कथित लापरवाही से गुस्साए ग्रामीणों और परिजनों ने न्याय की मांग को लेकर कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। शव मिलने के बाद से ही इलाके में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक इस मामले में पूरी तरह से निष्पक्ष न्यायिक जांच नहीं होती और लापरवाह पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक वे शांत बैठने वाले नहीं हैं। प्रदर्शनकारियों ने यह भी मांग की है कि इस मौत के पीछे यदि कोई राजनीतिक रंजिश या आपराधिक षड्यंत्र है, तो उसका भी पर्दाफाश किया जाना चाहिए। पुलिस के उच्च अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभालने की कोशिश की है और परिजनों को यह भरोसा दिलाया है कि इस पूरे मामले की गहनता से जांच की जाएगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

राजनीतिक हलकों में मचा भूचाल: विपक्षी दलों और पार्टी नेताओं ने सरकार को घेरा

एक राजनीतिक पार्टी से जुड़े जनप्रतिनिधि की इस तरह संदिग्ध अवस्था में लाश मिलने के बाद से राज्य की राजनीति भी गरमा गई है। विपक्षी दलों के नेताओं और 'आप' के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे कानून-व्यवस्था की विफलता करार दिया है। नेताओं का कहना है कि जब एक जनप्रतिनिधि ही सुरक्षित नहीं है, तो आम जनता की सुरक्षा का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। उन्होंने सरकार और पुलिस प्रशासन से मांग की है कि मृतक के परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए और इस मामले की सीबीआई या किसी उच्च स्तरीय विशेष जांच दल (SIT) से जांच कराई जाए ताकि सच सामने आ सके। आने वाले दिनों में यह मुद्दा तूल पकड़ सकता है और राजनीतिक सरगर्मी को और अधिक बढ़ा सकता है।

न्याय की आस में बैठा पीड़ित परिवार: क्या पुलिस की जांच से मिल पाएगा असली सच?

फिलहाल पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और विसरा रिपोर्ट तथा अन्य फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का यह दावा है कि वे हर एंगल से इस मामले की जांच कर रहे हैं—चाहे वह कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की जांच हो या फिर आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगालने की बात हो। लेकिन परिवार और ग्रामीणों का यह स्पष्ट कहना है कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिल जाता, उनका संघर्ष जारी रहेगा। एक उभरते हुए और जनप्रिय नेता की इस प्रकार रहस्यमयी मौत ने समाज में सुरक्षा और प्रशासनिक संवेदनशीलता को लेकर एक बड़ा सवाल छोड़ दिया है, जिसका जवाब हर कोई तलाश रहा है।