रेनवाल में लगी भीषण आग में 8 मवेशी जिंदा जले, छप्पर में रखा चारा भी जलकर राख
जयपुर जिले के ग्रामीण आंचल और आसपास के व्यावसायिक व कृषि क्षेत्रों में शुमार रेनवाल से एक बेहद दर्दनाक और रूह कंपा देने वाली खबर सामने आई है, जिसने पूरे इलाके के लोगों को अंदर से झकझोर कर रख दिया है। आमतौर पर शांत रहने वाले एक ग्रामीण ठिकाने पर उस वक्त अचानक हाहाकार मच गया जब आधी रात या तड़के के समय एक पशुबाड़े में अचानक भयानक आग भड़क उठी। देखते ही देखते आग की ऊंची-ऊंची लपटों ने पूरे छप्पर और आसपास के परिसर को अपनी आगोश में ले लिया। इस भीषण अग्निकांड में वहां बंधे हुए 8 बेकसूर मवेशी जिंदा जल गए, जिससे पूरे गांव और आसपास के इलाकों में मातम और सनसनी फैल गई है।
छप्पर और भारी मात्रा में रखा सूखा चारा बना आग का ईंधन, मची चीख-पुकार
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, जिस जगह पर यह घटना हुई वहां मवेशियों को बांधने के लिए पारंपरिक छप्पर बनाया गया था और उसके पास ही खाने के लिए सूखी घास व चारे का बड़ा जखीरा रखा हुआ था। गर्मियों या तेज हवाओं के मौसम में इस तरह के भंडारों में आग पकड़ने का खतरा हमेशा बना रहता है। जैसे ही आग की एक छोटी सी चिंगारी ने इस सूबे चारे को छुआ, वह पलभर में एक विकराल दावानल में बदल गई। मवेशियों के बंधे होने के कारण उन्हें भागने का मौका तक नहीं मिला और वे आग के बीच फंस गए। उनकी दर्दनाक चीखों और तड़प की आवाज सुनकर जब तक आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे, तब तक सब कुछ तबाह हो चुका था।
ग्रामीणों की कड़ी मशक्कत और फायर ब्रिगेड की लेट-लतीफी से बढ़ा नुकसान
घटना की भनक लगते ही आसपास के ग्रामीण अपनी नींद छोड़कर तुरंत मौके पर दौड़े और अपने स्तर पर आग बुझाने के लिए पानी की बाल्टी तथा मिट्टी फेंकना शुरू कर दिया। इस बीच घटना की सूचना स्थानीय पुलिस प्रशासन और दमकल विभाग को दी गई। हालांकि, ग्रामीण इलाकों की संकीर्ण गलियों और दूरदराज की लोकेशन होने के कारण फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को पहुंचने में काफी समय लग गया। तब तक आग इतनी भीषण रूप ले चुकी थी कि वहां रखा लाखों रुपए का भूसा, चारे का स्टॉक और मवेशियों के रहने का पूरा ढांचा जलकर पूरी तरह राख के ढेर में बदल चुका था। ग्रामीणों के अथक प्रयासों के बाद आग पर किसी तरह काबू पाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
पशुपालकों की आजीविका पर टूटा दुखों का पहाड़, प्रशासन से मुआवजे की गुहार
इस हृदयविदारक हादसे का शिकार हुए पीड़ित पशुपालक परिवार के लिए यह सदमा सहन करना बेहद मुश्किल हो रहा है। ग्रामीण इलाकों में मवेशी केवल जानवर नहीं बल्कि किसानों और पशुपालकों के परिवार के मुख्य सदस्य और उनकी आजीविका का एकमात्र सहारा होते हैं। एक झटके में अपने पालतू पशुओं को इस तरह खो देने से पीड़ित परिवार पर आर्थिक और मानसिक संकट का पहाड़ टूट पड़ा है। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय जनप्रतिनिधि, पटवारी और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। पीड़ित परिवार और ग्रामीणों ने सरकार तथा प्रशासन से मांग की है कि इस बड़े नुकसान का त्वरित आकलन करके उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए ताकि इस संकट की घड़ी में उनकी कुछ मदद हो सके।
ग्रामीण क्षेत्रों में आग की घटनाओं से बचाव के लिए सुरक्षा उपायों पर उठे सवाल
इस दर्दनाक हादसे के बाद रेनवाल और आसपास के गांवों में एक बार फिर से इस बात पर बहस छिड़ गई है कि ग्रामीण क्षेत्रों में पशुबाड़ों और घरों के पास रखे जाने वाले चारे की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए जाते। गर्मियों और सूखे के दिनों में शॉर्ट सर्किट या अन्य कारणों से इस तरह की आग लगने की घटनाएं आम हो जाती हैं, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण अक्सर भारी नुकसान उठाना पड़ता है। स्थानीय पुलिस और प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है और लोगों से अपील की है कि वे अपने पशुबाड़ों के पास आग या बिजली के खुले तारों से पूरी सावधानी बरतें ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी अनहोनी से बचा जा सके।