कलयुग के अंत को लेकर श्रीमद्भागवत पुराण में लिखी हैं ये बातें! क्या सच होने लगे हैं ये 5 बड़े इशारे?
सनातन धर्म के ग्रंथों में समय को चार युगों—सत्ययुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलयुग में बांटा गया है। वर्तमान में हम कलयुग के दौर से गुजर रहे हैं, जिसे सबसे अंधकारमय युग माना गया है। आज से हजारों साल पहले लिखे गए श्रीमद्भागवत पुराण (Shrimad Bhagavata Purana) के 12वें स्कंध में महर्षि वेदव्यास जी ने कलयुग के अंत और उस समय समाज की स्थिति को लेकर कई बेहद सटीक भविष्यवाणियां की थीं। आज के बदलते सामाजिक, नैतिक और पर्यावरणीय हालातों को देखकर लोग अक्सर यह सवाल पूछते हैं कि क्या कलयुग के अंत के वे खौफनाक इशारे अब सच होने लगे हैं?
1. पैसा और ताकत ही बनेगी योग्यता का पैमाना
श्रीमद्भागवत पुराण के श्लोकों के अनुसार, कलयुग में किसी व्यक्ति की योग्यता, ज्ञान या गुणों की कद्र नहीं होगी। समाज में जिसके पास जितना अधिक धन और भौतिक साधन होंगे, उसे ही सबसे ऊंचा, सदाचारी और शक्तिशाली माना जाएगा। आज के कॉर्पोरेट और सोशल मीडिया के दौर में यह साफ देखा जा सकता है, जहां इंसान की नैतिकता से ज्यादा उसकी नेटवर्थ और पैसों के आधार पर समाज में उसका स्टेटस और सम्मान तय होने लगा है।
2. सिर्फ दिखावा रह जाएगा विवाह और रिश्ते
पुराण में लिखा गया है कि कलयुग के आगे बढ़ने पर विवाह जैसी पवित्र संस्था सिर्फ एक कॉन्ट्रैक्ट या शारीरिक और आर्थिक समझौते तक सीमित रह जाएगी। पति-पत्नी और परिवार के बीच का पारस्परिक प्रेम खत्म हो जाएगा और लोग सिर्फ बाहरी आकर्षण या स्वार्थ के लिए रिश्ते बनाएंगे। आज के दौर में तेजी से बढ़ते तलाक के मामले, बिखरते संयुक्त परिवार और रिश्तों में आता अविश्वास इस पौराणिक भविष्यवाणी को सच साबित करता हुआ दिखाई देता है।
3. अकाल, भुखमरी और मौसम का बिगड़ेगा मिजाज
पर्यावरण और प्रकृति को लेकर भागवत पुराण में स्पष्ट लिखा है कि कलयुग के अंत में धरती पर भयंकर सूखा, अकाल और बेमौसम बरसात होगी। नदियां सूखने लगेंगी और इंसान बूंद-बूंद पानी और अन्न के दानों के लिए तरसेगा। आज ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) और क्लाइमेट चेंज के रूप में पूरी दुनिया इस बदलाव को झेल रही है। दुनिया के कई हिस्सों में गंभीर जल संकट और भीषण गर्मी या बाढ़ का प्रकोप लगातार बढ़ता ही जा रहा है।
4. छोटी उम्र में बाल सफेद होना और घटती उम्र
ग्रंथों के अनुसार, कलयुग के अंतिम चरण में इंसानी शरीर कमजोर हो जाएगा। कलयुग की शुरुआत में जहां इंसान की औसत आयु 100 वर्ष थी, वह अंत तक आते-आते महज 20 से 30 वर्ष रह जाएगी। साथ ही बहुत कम उम्र (बचपन या किशोरावस्था) में ही लोगों के बाल सफेद होने लगेंगे और वे बुढ़ापे व गंभीर बीमारियों की चपेट में आने लगेंगे। आज के समय में खराब लाइफस्टाइल, मिलावटी खानपान और बढ़ते प्रदूषण के कारण युवाओं में गंभीर बीमारियां और बालों का सफेद होना बेहद आम बात हो चुकी है।
5. अधर्म और झूठ का होगा बोलबाला
श्रीमद्भागवत पुराण में कहा गया है कि कलयुग में जो व्यक्ति जितना बड़ा झूठा, ढोंगी और चालाक होगा, वह व्यापार और राजनीति में उतना ही सफल माना जाएगा। धर्म के नाम पर केवल आडंबर और पाखंड रह जाएगा और सच्चे संतों की जगह ढोंगी गुरुओं का प्रभाव बढ़ेगा। आज के समाज में जहां ईमानदारी पर चालाकी हावी होती दिख रही है, उसे देखकर अक्सर लोग पुराणों की इन बातों को याद करते हैं कि कलयुग अपने चरम की तरफ बढ़ रहा है।