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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन राव भागवत ने शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित सामाजिक सद्भाव विचार गोष्ठी में कहा कि समाज की समस्याओं का समाधान केवल सरकार से संभव नहीं है। इसके लिए समाज को स्वयं जिम्मेदारी लेनी होगी।

भारत पहले से ही हिंदू राष्ट्र

भागवत ने कहा कि भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि यह पहले से ही हिंदू राष्ट्र है। देश की पहचान उसकी विविधता, समन्वय और आपसी सहयोग में निहित है। उन्होंने समाज में संतुलन, समरसता और सहयोग की भावना बनाए रखने पर जोर दिया।

समाज को जोड़ने की आवश्यकता

सरसंघचालक ने कहा कि अंग्रेजों ने अलगाव की नीति अपनाकर देश पर शासन किया, लेकिन अब समाज को जोड़ने की जरूरत है। गांव और प्रखंड स्तर पर सामाजिक संगठनों को भौतिक और नैतिक विकास के लिए सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

सेवा के लिए सभी वर्गों को आगे आने का आह्वान

भागवत ने कहा कि सेवा केवल संपन्न लोग ही नहीं करते, बल्कि जिनके मन में करुणा और सद्भाव होता है, वही जरूरतमंदों की सच्ची सेवा कर पाते हैं। समाज के हर वर्ग को अभावग्रस्त और पीड़ित लोगों की मदद के लिए आगे आना चाहिए।

राजनीति से दूरी और सामूहिक पहल

संवाद कार्यक्रम के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि मंच का उद्देश्य राजनीति नहीं, बल्कि समाज के लिए किए जा रहे सेवा कार्यों को साझा करना है। उन्होंने संगठनों को यह बताने के लिए प्रेरित किया कि वे अपने समाज के साथ-साथ अन्य समाजों के लिए क्या कार्य कर रहे हैं। भागवत ने सामूहिक पहल और गांव-प्रखंड स्तर पर बैठकों के माध्यम से सभी वर्गों को जोड़ने की महत्वता पर जोर दिया।

सामाजिक संगठनों के योगदान की चर्चा

कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने कोरोना काल में किए गए सेवा कार्यों, गरीब बच्चियों की शादी, जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा, भोजन व्यवस्था और रोजगार सृजन से जुड़ी पहलों की जानकारी साझा की। इस अवसर पर क्षेत्र संघचालक देवव्रत पाहन, उत्तर बिहार संघचालक अधिवक्ता गौरीशंकर प्रसाद, प्रांत प्रचारक रविशंकर सिंह बिशेन, वाल्मीकि विमल और कई स्वयंसेवक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन चन्द्रमोहन खन्ना ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन विश्व हिंदू परिषद के प्रदेश अध्यक्ष संजीव कुमार ने किया।

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