अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के पटल पर एक बार फिर गूंजेगी 'सैंडपेपर कांड' की गूंज

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के पटल पर एक बार फिर गूंजेगी 'सैंडपेपर कांड' की गूंज

क्रिकेट के इतिहास में जब भी सबसे बड़े विवादों और शर्मनाक पलों की फेहरिस्त बनाई जाती है, तो दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर हुआ वह कुख्यात 'सैंडपेपर गेट' (Sandpaper Gate) कांड हमेशा सबसे ऊपर दर्ज रहता है, जिसने ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट की छवि को गहरा आघात पहुंचाया था। उस समय भले ही इस मामले में कई खिलाड़ियों पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए थे और समय के साथ यह मामला शांत होता दिख रहा था, लेकिन अब एक बार फिर से इस पुराने जख्म के हरे होने की पूरी तैयारी हो चुकी है। ऑस्ट्रेलियाई टीम के अनुभवी और बेहद शांत स्वभाव के ओपनिंग बल्लेबाज उस्मान ख्वाजा (Usman Khawaja) अपनी आगामी ऑटोबायोग्राफी (आत्मकथा) को लेकर इन दिनों अंतरराष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में छाए हुए हैं। बताया जा रहा है कि उनकी इस बहुप्रतीक्षित किताब में उस पूरे घटनाक्रम, ड्रेसिंग रूम के भीतर की खामोशी और उन अनकहे सच से पर्दा उठाया जाने वाला है जिन्हें अब तक पर्दे के पीछे ही रखा गया था। जैसे ही यह खबर क्रिकेट गलियारों में फैली, खेल प्रेमियों और विश्लेषकों के बीच यह चर्चा शुरू हो गई कि इस किताब के आने के बाद एक बार फिर से ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट के भीतर पुराने राजनीतिक और वैचारिक मतभेद खुलकर सामने आ सकते हैं।

कप्तान पैट कमिंस का बेबाक बयान: 'हमें इस किताब और उसके खुलासों से किसी भी प्रकार की कोई परेशानी नहीं है'

जब उस्मान ख्वाजा की इस आत्मकथा में सैंडपेपर कांड जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बड़े खुलासे होने की चर्चा जोर पकड़ने लगी, तो स्वाभाविक रूप से मीडिया की निगाहें मौजूदा टेस्ट कप्तान पैट कमिंस (Pat Cummins) के ऊपर टिक गईं कि वे इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं। कप्तान पैट कमिंस ने एक पेशेवर और परिपक्व नेता की तरह प्रतिक्रिया देते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि उनकी टीम या उन्हें उस्मान ख्वाजा की इस किताब से किसी भी प्रकार की कोई घबराहट या परेशानी नहीं है। कमिंस ने यह कहा कि उस्मान ख्वाजा एक वरिष्ठ खिलाड़ी हैं और उन्हें अपने जीवन के अनुभवों और क्रिकेट के सफर को अपने तरीके से लिखने तथा साझा करने का पूरा अधिकार है। कप्तान के इस शांत और संतुलित बयान ने एक तरफ जहां मीडिया की तमाम अटकलों पर विराम लगाने का काम किया, वहीं दूसरी तरफ यह भी दर्शाया कि आधुनिक ऑस्ट्रेलियाई टीम अब अतीत के बोझ तले दबने के बजाय वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित करने में विश्वास रखती है। हालांकि, खेल विश्लेषक यह अच्छी तरह जानते हैं कि जब किताबें इस स्तर के बड़े विवादों पर से पर्दा उठाती हैं, तो पर्दे के पीछे की राजनीति और खिलाड़ियों के आपसी रिश्तों पर बहस होना लाजमी हो जाता है।

क्या था वह सैंडपेपर कांड जिसने हिलाकर रख दिया था विश्व क्रिकेट का पूरा साम्राज्य?

साल 2018 का वह दक्षिण अफ्रीका दौरा ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट इतिहास का सबसे काला अध्याय साबित हुआ था, जब केपटाउन टेस्ट मैच के दौरान बॉल टैंपरिंग यानी गेंद से छेड़छाड़ करने का यह शर्मनाक मामला कैमरे में कैद हो गया था। उस समय टीम के कप्तान स्टीव स्मिथ, उप-कप्तान डेविड वार्नर और बल्लेबाज कैमरन बैनक्रॉफ्ट को इस साजिश में मुख्य रूप से लिप्त पाया गया था, जिसके बाद क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया (CA) ने उन पर कड़े प्रतिबंध लगाते हुए लंबी अवधि के लिए बैन लगा दिया था। इस घटना के बाद पूरी टीम की खेल भावना पर सवालिया निशान लग गए थे और क्रिकेट जगत में हड़कंप मच गया था कि कैसे एक प्रतिष्ठित टीम ने जीत हासिल करने के लिए इस तरह के अनैतिक रास्ते का सहारा लिया। उस्मान ख्वाजा उस समय भी टीम का हिस्सा थे और उन्होंने नजदीक से देखा था कि कैसे इस एक घटना ने पूरी टीम के अंदरूनी माहौल, कोचिंग स्टाफ की भूमिका और खिलाड़ियों के मानसिक स्वास्थ्य को बुरी तरह से प्रभावित किया था। अब जब वे अपनी इस आत्मकथा के पन्नों में उस दौर के अनकहे सच और दबावों को बयां करेंगे, तो यकीनन कई पुराने चेहरों के राज बाहर आएंगे।

वर्तमान ऑस्ट्रेलियाई टीम पर क्या पड़ेगा इस किताब के प्रकाशन का असर और क्या हैं फैंस की प्रतिक्रियाएं?

आज जब पैट कमिंस के नेतृत्व में ऑस्ट्रेलियाई टीम विश्व क्रिकेट में एक मजबूत और अनुशासित इकाई के रूप में अपनी पहचान बना चुकी है, ऐसे में पुराने विवादों का दोबारा ताजा होना टीम की लय को थोड़ा बहुत प्रभावित कर सकता है। क्रिकेट प्रेमियों और खेल जानकारों का एक वर्ग यह मान रहा है कि इस तरह के खुलासों से ड्रेसिंग रूम की पुरानी कड़वाहटें फिर से सतह पर आ सकती हैं, जिससे आने वाली सीरीज के दौरान खिलाड़ियों पर मानसिक दबाव बन सकता है। इसके विपरीत, दूसरा पक्ष यह मानता है कि सच का सामने आना और अतीत की गलतियों से सीख लेकर आगे बढ़ना ही एक परिपक्व खेल संस्कृति की निशानी होती है। उस्मान ख्वाजा की यह आत्मकथा जब आधिकारिक तौर पर बाजार में आएगी, तो इसके हर एक अध्याय पर खेल जगत में लंबी बहस छिड़ना तय है। अंततः, इस बात में कोई दो राय नहीं है कि सैंडपेपर कांड का यह भूत एक बार फिर से जिंदा हो चुका है, और यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि किताब के पन्नों में छिपे राज ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट और उसके प्रशंसकों की उम्मीदों पर क्या असर डालते हैं।