Prabhat Vaibhav, Digital Desk : दक्षिण भारत के 'पटाखा हब' कहे जाने वाले तमिलनाडु के विरुधुनगर जिले से रोंगटे खड़े कर देने वाली खबर सामने आई है। यहाँ कट्टनरपट्टी स्थित एक पटाखा कारखाने में रविवार रात हुए भीषण विस्फोट ने हंसते-खेलते परिवारों की खुशियाँ छीन लीं। रसायनों के घर्षण से लगी आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया, जिसकी चपेट में आने से 20 श्रमिकों की मौके पर ही मौत हो गई। धमाका इतना जोरदार था कि इसकी गूँज करीब 10 किलोमीटर दूर तक सुनी गई और फैक्ट्री की इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई।
केमिकल मिक्सिंग के दौरान हुआ हादसा, मलबे में तब्दील हुई फैक्ट्री
प्रारंभिक जांच के अनुसार, यह हृदयविदारक घटना मुथुमानिकम के स्वामित्व वाली 'वंजा आतिशबाजी कारखाने' (Vanja Fireworks) में घटी। चश्मदीदों के मुताबिक, हादसे के वक्त करीब 30 मजदूर काम में जुटे थे। बताया जा रहा है कि पटाखों के लिए अति-ज्वलनशील रसायनों का मिश्रण तैयार करते समय अचानक हुए घर्षण (Chemical Friction) ने चिंगारी का रूप ले लिया। पलक झपकते ही पूरी फैक्ट्री धमाकों से दहल उठी। विस्फोट इतना घातक था कि कारखाने के चार कमरे पूरी तरह नष्ट हो गए और चारों तरफ सिर्फ धुआं और चीख-पुकार सुनाई देने लगी।
मौके पर पहुंचे दो मंत्री, रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी जेसीबी मशीनें
घटना की गंभीरता को देखते हुए तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने फौरन एक्शन लिया है। उन्होंने कैबिनेट के दो वरिष्ठ मंत्रियों—के.के.एस.आर. रामचंद्रन और थंगम थेन्नारासु को तुरंत घटनास्थल पर भेजा है। जिला कलेक्टर और एसपी श्रीनाथ खुद मौके पर मौजूद रहकर बचाव कार्य की कमान संभाल रहे हैं। मलबे के नीचे अभी भी कई मजदूरों के दबे होने की आशंका है, जिन्हें निकालने के लिए जेसीबी और भारी मशीनों की मदद ली जा रही है। घायलों को पास के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ कई की हालत नाजुक बनी हुई है।
सवालों के घेरे में सुरक्षा मानक: शिवकाशी क्षेत्र में क्यों नहीं रुक रहे हादसे?
विरुधुनगर और शिवकाशी का इलाका पूरे भारत का सबसे बड़ा पटाखा निर्माण केंद्र है, लेकिन यहाँ बार-बार होने वाले हादसों ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। अक्सर क्षमता से अधिक बारूद का भंडारण और सुरक्षा नियमों की अनदेखी इन मौतों की वजह बनती है। मुख्यमंत्री स्टालिन ने इस त्रासदी पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए जांच के आदेश दिए हैं। प्रशासन अब इस बात की पड़ताल कर रहा है कि क्या फैक्ट्री के पास वैध लाइसेंस था और क्या वहाँ केमिकल हैंडलिंग के नियमों का पालन किया जा रहा था। फिलहाल, सरकार का पूरा जोर घायलों को बेहतर इलाज मुहैया कराने और मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने पर है।
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