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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : दुनिया इस वक्त इतिहास के सबसे खतरनाक दौर से गुजर रही है। एक तरफ जहां मिडिल ईस्ट में ईरान और इजरायल के बीच छिड़ा संघर्ष अपने ग्यारहवें दिन में प्रवेश कर चुका है, वहीं दूसरी ओर रूस और यूक्रेन के बीच जारी खूनी जंग अब अपने पांचवें साल की दहलीज पर खड़ी है। तेहरान और यरुशलम से उठते धमाकों के शोर में भले ही यूक्रेन की खबरें कुछ कम हुई हों, लेकिन वहां हो रहा विनाश द्वितीय विश्व युद्ध की भयावह यादों को ताजा कर रहा है।

मौतों का भयावह आंकड़ा: 4 लाख से अधिक सैनिकों ने गंवाई जान

24 फरवरी, 2022 को शुरू हुए इस युद्ध ने इंसानी जानों की जो कीमत वसूली है, वह रूह कंपा देने वाली है। हालांकि रूस और यूक्रेन दोनों ही अपने सैन्य नुकसान के सटीक आंकड़े छिपाते रहे हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय संगठनों की रिपोर्टें हकीकत बयां कर रही हैं। 'सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज' (CSIS) के ताजा अनुमान के मुताबिक, अब तक लगभग 3,25,000 रूसी सैनिक मारे जा चुके हैं। वहीं, यूक्रेन के सैन्य नुकसान का आंकड़ा 1,00,000 से 1,40,000 के बीच होने की आशंका है, हालांकि राष्ट्रपति जेलेंस्की आधिकारिक तौर पर 55,000 मौतों की बात कहते हैं।

आम नागरिकों का नरसंहार और तबाह होते शहर

इस युद्ध की सबसे बड़ी मार आम मासूम जनता पर पड़ी है। संयुक्त राष्ट्र (UN) ने अब तक 15,000 से अधिक यूक्रेनी नागरिकों की मौत की आधिकारिक पुष्टि की है, लेकिन जानकारों का मानना है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं ज्यादा है। मारियुपोल, बखमुत और तोरेत्स्क जैसे शहर, जो कभी गुलजार हुआ करते थे, अब सिर्फ नक्शे पर खंडहर के रूप में शेष हैं। रूसी कब्जे वाले क्षेत्रों में स्थिति और भी गंभीर है, जहां से मौतों के सटीक आंकड़े बाहर नहीं आ पा रहे हैं।

विस्थापन की त्रासदी: 60 लाख के करीब पहुंचे शरणार्थी

जान गंवाने वालों के अलावा, करोड़ों जिंदगियां बेघर हो चुकी हैं। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग (UNHCR) के आंकड़ों के अनुसार, लगभग 59 लाख यूक्रेनी नागरिक विदेशों में शरणार्थी के तौर पर रहने को मजबूर हैं। वहीं, देश के भीतर भी करीब 37 लाख लोग विस्थापित हुए हैं। सबसे दर्दनाक पहलू बच्चों से जुड़ा है; यूक्रेन का आरोप है कि रूस ने लगभग 20,000 बच्चों का जबरन अपहरण कर उन्हें अपने कब्जे वाले क्षेत्रों में भेज दिया है।

लैंडमाइन का जाल और बुनियादी ढांचे का विनाश

यूक्रेन की उपजाऊ धरती अब 'मौत का जाल' बन चुकी है। देश का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा बारूदी सुरंगों (Landmines) और जिंदा बमों से भरा पड़ा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, स्वास्थ्य सेवाओं को निशाना बनाते हुए अब तक 2,800 से अधिक हमले अस्पतालों पर हुए हैं। रूस द्वारा ऊर्जा केंद्रों को तबाह किए जाने से लाखों लोग कड़ाके की ठंड में बिना बिजली और हीटिंग के रहने को मजबूर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तबाही से उबरने और पुनर्निर्माण में दशकों का समय और खरबों डॉलर का खर्च आएगा।