img

Prabhat Vaibhav,Digital Desk : मध्य पूर्व (Middle East) में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच छिड़े भीषण संग्राम ने वैश्विक अर्थव्यवस्था का गणित पूरी तरह बदल दिया है। जहां एक ओर वाशिंगटन इस युद्ध में रोजाना अरबों डॉलर पानी की तरह बहा रहा है, वहीं दूसरी ओर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस संकट को एक सुनहरे अवसर में बदल दिया है। जिस रूस को अमेरिका आर्थिक रूप से अलग-थलग करना चाहता था, वही आज वैश्विक तेल बाजार का 'किंगमेकर' बनकर उभरा है।

ट्रम्प की रणनीति पड़ी उल्टी: रूस पर बढ़ा भारत-चीन का भरोसा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पदभार संभालते ही रूस की अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचाने के लिए भारत और चीन जैसे देशों पर कड़ा दबाव बनाया था। यहां तक कि रूस से तेल खरीदने पर अतिरिक्त कर (Tax) लगाने की भी कोशिश की गई। लेकिन जैसे ही अमेरिका और इजरायल ने ईरान के तेल ठिकानों पर हमला किया, खाड़ी देशों की सप्लाई चेन ध्वस्त हो गई। दुनिया में तेल की हाहाकार मची तो अमेरिका को अपनी जिद छोड़नी पड़ी और भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की विशेष छूट देने पर मजबूर होना पड़ा।

रूसी कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग: 20% बढ़ा मुनाफा

ईरान के तेल भंडारों पर बमबारी के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई हैं। इसका सीधा फायदा रूस को मिला है। युद्ध से पहले जो रूसी तेल 65 से 68 डॉलर प्रति बैरल के भाव पर मिल रहा था, उसकी कीमत अब 78 से 82 डॉलर तक पहुंच गई है। पिछले 10 दिनों में रूसी तेल की मांग में 25 प्रतिशत का इजाफा हुआ है, जिसका सीधा मुनाफा पुतिन की तिजोरी में जा रहा है।

भारत के लिए घटा डिस्काउंट: पुतिन की 'बिजनेस चाल'

रूस ने बदलती परिस्थितियों का फायदा उठाते हुए अपनी व्यापारिक नीतियों में भी बदलाव किया है। पहले रूस भारत को कच्चे तेल पर प्रति बैरल 8 से 10 डॉलर की भारी छूट देता था, जिसे अब घटाकर मात्र 2 से 4 डॉलर कर दिया गया है। रूस ने अपनी तेल आपूर्ति को भी 32 लाख बैरल से बढ़ाकर 35 लाख बैरल प्रतिदिन कर दिया है। पुतिन ने यूरोपीय देशों को भी सीधा संदेश दे दिया है कि यदि वे राजनीतिक दबाव हटाते हैं, तो रूस उन्हें फिर से गैस और तेल की सप्लाई शुरू कर सकता है।

अमेरिका का भारी नुकसान: हर दिन गवां रहा ₹8,000 करोड़ से ज्यादा

इस युद्ध में असली चोट अमेरिका के सरकारी खजाने पर पड़ रही है। एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका इस सैन्य संघर्ष में प्रतिदिन लगभग 891 मिलियन डॉलर (करीब 8,223 करोड़ रुपये) खर्च कर रहा है। युद्ध के पहले ही सप्ताह में अमेरिका का सैन्य खर्च 6 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर गया। एक तरफ जहां अमेरिकी मिसाइलें और लड़ाकू विमान करोड़ों रुपये हवा में फूंक रहे हैं, वहीं रूस शांति से अपना व्यापार बढ़ाकर मालामाल हो रहा है।