Prabhat Vaibhav,Digital Desk : मिडिल ईस्ट (Middle East) में ईरान और इजरायल के बीच छिड़े भीषण युद्ध ने पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार में हड़कंप मचा दिया है। खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही पर लगी पाबंदियों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि खाड़ी देशों से तेल की सप्लाई पूरी तरह बंद हो जाए, तो कौन सा देश कितने दिन तक टिक पाएगा?
खाड़ी देश क्यों हैं दुनिया की 'लाइफलाइन'?
सऊदी अरब, कुवैत, यूएई, इराक और ईरान जैसे खाड़ी देश पूरी दुनिया की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने वाले मुख्य स्तंभ हैं। विशेष रूप से एशिया और यूरोप के देश अपनी परिवहन व्यवस्था, कल-कारखाने और बिजली उत्पादन के लिए इन्हीं देशों से आने वाले कच्चे तेल पर निर्भर हैं। यदि इस मार्ग से तेल की आपूर्ति रुकती है, तो इसका सीधा और सबसे घातक असर एशियाई अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ेगा।
खतरे की घंटी: पाकिस्तान और वियतनाम सबसे पहले होंगे बेहाल
यदि सप्लाई चेन पूरी तरह ठप होती है, तो हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान की स्थिति सबसे ज्यादा नाजुक हो सकती है। आंकड़ों के मुताबिक, पाकिस्तान के पास केवल 20 से 28 दिनों का ही तेल भंडार बचा है। इसका मतलब है कि एक महीने से कम समय में वहां की सड़कें सूनी हो सकती हैं। अन्य देशों की स्थिति भी कुछ खास नहीं है:
वियतनाम: केवल 15 दिनों का स्टॉक।
इंडोनेशिया: लगभग 20 दिनों का स्टॉक।
थाईलैंड और फिलीपींस: करीब 60 दिनों का सुरक्षित भंडार।
कितना सुरक्षित है भारत? रणनीति और स्टॉक का गणित
दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता होने के नाते भारत अपनी जरूरत का 80% से अधिक हिस्सा आयात करता है। लेकिन घबराने की बात नहीं है, क्योंकि भारत ने 'रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार' (SPR) के तहत लगभग 50 दिनों की खपत का कच्चा तेल सुरक्षित रखा हुआ है।
इसके अलावा, भारत ने हाल के वर्षों में अपनी तेल खरीद नीति में बड़ा बदलाव किया है। हम अब केवल खाड़ी देशों पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि रूस जैसे अन्य देशों से भी भारी मात्रा में तेल आयात कर रहे हैं। ईरान ने भी साफ किया है कि उसका लक्ष्य केवल अमेरिका और इजरायल के जहाज हैं, जिससे भारतीय जहाजों को सीधा खतरा कम है।
तैयारी में कौन है नंबर 1? जापान और अमेरिका की मजबूत दीवार
संकट से निपटने के मामले में कुछ देशों ने मिसाल पेश की है:
जापान: अपनी 95% जरूरतों के लिए खाड़ी पर निर्भर होने के बावजूद जापान ने 260 दिनों का विशाल भंडार जमा कर रखा है।
दक्षिण कोरिया: इसके पास करीब 210 दिनों का तेल भंडार है।
चीन: दुनिया के सबसे बड़े आयातक के पास 90 से 104 दिनों का स्टॉक है।
अमेरिका: खुद एक बड़ा उत्पादक होने के साथ-साथ अमेरिका ने 200 दिनों तक का सुरक्षित स्टॉक बना रखा है।




