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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश का हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर पिछले नौ वर्षों में एक क्रांतिकारी बदलाव का गवाह बना है। प्रदेश में लागू किए गए रीजनल रिसोर्स एंड ट्रेनिंग सेंटर (RRTC) मॉडल ने स्वास्थ्य सेवाओं को जिला और ब्लॉक स्तर तक इतना मजबूत कर दिया है कि अब गंभीर बीमारियों और जटिल प्रसव के मामलों को बड़े शहरों की ओर रेफर करने की पुरानी मजबूरी खत्म हो रही है। इस मॉडल की सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण मातृ एवं नवजात मृत्यु दर में आई भारी कमी है।

RRTC मॉडल: मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य का 'नॉलेज हब'

उत्तर प्रदेश सरकार ने मातृ एवं नवजात मृत्यु दर को कम करने के लिए एक 'सिस्टम स्ट्रेंथनिंग इंजन' के रूप में RRTC मॉडल को विकसित किया है।

20 मेडिकल कॉलेज बने केंद्र: वर्तमान में प्रदेश के 20 मेडिकल कॉलेज इस मॉडल के तहत 'नॉलेज हब' के रूप में कार्य कर रहे हैं।

विशेषज्ञता का विस्तार: ये हब जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) को तकनीकी मार्गदर्शन और आपातकालीन स्थितियों में त्वरित निर्णय लेने में मदद करते हैं।

मेंटरिंग सिस्टम: अलीगढ़ का जेएन मेडिकल कॉलेज जैसे संस्थान अब हाथरस और कासगंज जैसे पड़ोसी जिलों के स्टाफ को 'ऑन-साइट मेंटरिंग' दे रहे हैं।

डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ का सशक्तीकरण

इस मॉडल की रीढ़ इसका प्रशिक्षित मानव संसाधन है। बुनियादी ढांचे के साथ-साथ सरकार ने डॉक्टरों के कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिया है:

विशाल प्रशिक्षण अभियान: पिछले चार वर्षों में 76 जिला अस्पतालों के 1,791 डॉक्टरों को विशेष और उच्च स्तरीय प्रशिक्षण प्रदान किया गया है।

जटिल मामलों का प्रबंधन: इस ट्रेनिंग के बाद स्थानीय डॉक्टर अब 'हेटरोटॉपिक प्रेग्नेंसी' (Heterotopic Pregnancy) जैसे जानलेवा और दुर्लभ मामलों को भी आत्मविश्वास के साथ संभालने में सक्षम हैं।

बदलाव की मिसाल: कासगंज जिला अस्पताल

आरआरटीसी मॉडल का सबसे प्रभावी असर कासगंज जिला महिला अस्पताल में देखा जा सकता है।

2017 बनाम 2026: साल 2017 से पहले जहां एक सफल सी-सेक्शन (सिजेरियन) होना भी चुनौतीपूर्ण था, आज वहां का ऑपरेशन थिएटर आधुनिक सुविधाओं से लैस है।

स्थानीय स्तर पर समाधान: अब कासगंज के मरीजों को आगरा या अलीगढ़ भागने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे न केवल इलाज का खर्च कम हुआ है, बल्कि 'गोल्डन ऑवर' में इलाज मिलने से जीवन रक्षा दर भी बढ़ी है।

संकट काल में भी अडिग रही व्यवस्था

कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारी के दौरान भी इस मॉडल ने अपनी मजबूती साबित की। चुनौतीपूर्ण समय में भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ का प्रशिक्षण जारी रहा। सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि संकट के दौर में भी संस्थागत प्रसव (Institutional Delivery) और नवजात देखभाल जैसी अनिवार्य सेवाएं बाधित न हों।