Prabhat Vaibhav, Digital Desk : दुनिया के सबसे ताकतवर नेता और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने तेवरों से वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। ईरान के साथ बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालातों के बीच, ट्रंप प्रशासन ने ईरान की आर्थिक रीढ़ यानी तेल व्यापार पर कड़ा प्रहार किया है। इस बार निशाने पर ईरान का सबसे बड़ा खरीदार 'चीन' आया है। अमेरिका ने चीन की दिग्गज रिफाइनरी और दर्जनों जहाजों पर कड़े प्रतिबंध (Sanctions) लगा दिए हैं।
हेंगली पेट्रोकेमिकल पर गिरी गाज, अरबों डॉलर का खेल खत्म?
अमेरिकी वित्त विभाग के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) ने चीन की हेंगली पेट्रोकेमिकल (डालियान) रिफाइनरी कंपनी लिमिटेड के खिलाफ कार्रवाई की है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह कंपनी ईरान से कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पादों को खरीदने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि इस कंपनी के जरिए ईरान अपनी सेना (सशस्त्र बल) को लाखों डॉलर का राजस्व पहुंचा रहा था।
ईरान का 'गुप्त बेड़ा' (Ghost Fleet) अब रडार पर
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने साफ कर दिया है कि राष्ट्रपति ट्रंप के निर्देश पर ईरान के तथाकथित "गुप्त बेड़े" को तबाह करने की तैयारी है।
जहाजों पर एक्शन: अमेरिका ने लगभग 40 शिपिंग कंपनियों और उनके जहाजों को ब्लैकलिस्ट किया है।
19 नए प्रतिबंध: हाल ही में 19 और जहाजों पर बैन लगाया गया है, जो दुनिया भर में ईरानी कच्चे तेल और एलपीजी (LPG) की तस्करी कर रहे थे।
उद्देश्य: इन प्रतिबंधों का एकमात्र लक्ष्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मध्य पूर्व में उसकी आक्रामकता को मिलने वाली वित्तीय मदद को रोकना है।
चीनी 'टीपॉट्स' को चेतावनी
चीन में मौजूद स्वतंत्र रिफाइनरियां, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार में "टीपॉट्स" कहा जाता है, ईरान के कच्चे तेल की मुख्य खरीदार हैं। हेंगली इस सूची में दूसरी सबसे बड़ी कंपनी है। अमेरिकी वित्त विभाग के अनुसार, हेंगली ने प्रतिबंधित जहाजों के जरिए अरबों डॉलर का तेल खरीदा, जिससे सीधे तौर पर ईरानी शासन को मजबूती मिली। अब अमेरिका ने चेतावनी दी है कि इस गतिविधि में शामिल किसी भी बिचौलिए या खरीदार को बख्शा नहीं जाएगा।
क्या होगा इन प्रतिबंधों का असर?
अमेरिकी कानून के तहत लगाए गए इन प्रतिबंधों के परिणाम काफी गंभीर होंगे:
संपत्ति फ्रीज: प्रतिबंधित कंपनियों और व्यक्तियों की अमेरिका में स्थित सभी संपत्तियां फ्रीज (Freeze) कर दी गई हैं।
लेन-देन पर रोक: कोई भी अमेरिकी नागरिक या संस्थान इनके साथ व्यापार नहीं कर पाएगा।
विदेशी कंपनियों को दंड: यदि कोई अन्य विदेशी कंपनी इन प्रतिबंधित संस्थाओं के साथ लेन-देन करती है, तो उसे भी अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा।
डोनाल्ड ट्रंप का यह फैसला न केवल ईरान के लिए एक बड़ी चुनौती है, बल्कि चीन के साथ उनके व्यापारिक युद्ध (Trade War) के अगले अध्याय की शुरुआत भी मानी जा रही है।
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