Prabhat Vaibhav,Digital Desk : उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPCL) की कार्यप्रणाली पर कैग (CAG) की ताजा रिपोर्ट ने हड़कंप मचा दिया है। विधानसभा में पेश की गई इस रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि विभाग की घोर लापरवाही के कारण प्रदेश को 5 अरब रुपये की बिजली का चूना लगा है। इतना ही नहीं, विभाग ने बिना मीटर रीडिंग लिए ही उपभोक्ताओं को करोड़ों के बिल थमा दिए, जिससे जनता और सरकारी खजाने दोनों पर दोहरी मार पड़ी है।
रुड़की और रुद्रपुर में सबसे ज्यादा 'शॉर्ट सर्किट', 488 करोड़ स्वाहा
कैग की रिपोर्ट के मुताबिक, यूपीसीएल के लाइन लॉस (Line Loss) ने विकास की चमक फीकी कर दी है। विशेष रूप से रुड़की, लक्सर और रुद्रपुर क्षेत्रों में 964 मिलियन यूनिट बिजली बर्बाद हो गई। तकनीकी खामियों और निगरानी के अभाव में हुए इस नुकसान की कीमत 488 करोड़ रुपये आंकी गई है। रिपोर्ट में तीखी आपत्ति जताते हुए कहा गया है कि बिजली चोरी रोकने के लिए जिस विशेष सेल के गठन का वादा किया गया था, वह आज तक कागजों से बाहर नहीं आ पाया। न पर्याप्त पुलिस बल मिला और न ही छापेमारी दल सक्रिय हो सके।
अंधेर नगरी: बिना रीडिंग के 385 करोड़ की वसूली का खेल
उपभोक्ताओं के लिए सबसे चौंकाने वाला खुलासा बिलिंग सिस्टम को लेकर हुआ है। ऑडिट में सामने आया कि वर्ष 2021 से 2024 के बीच विभाग ने केवल 31 प्रतिशत मीटरों की ही जांच की। विभाग ने अपनी सुस्ती छिपाने के लिए 1 लाख 13 हजार उपभोक्ताओं को बिना वास्तविक रीडिंग के ही औसत बिल थमा दिए, जिसकी कुल राशि 385 करोड़ रुपये है। कैग ने यूपीसीएल के बिलिंग, वसूली और मॉनिटरिंग सिस्टम पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि उच्च अधिकारी फील्ड में जाकर निरीक्षण करने के बजाय दफ्तरों तक सीमित हैं।
स्मार्ट सिटी या 'घपला' सिटी? 75 करोड़ की अनियमितताएं उजागर
कैग की रडार पर केवल बिजली विभाग ही नहीं, बल्कि देहरादून स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट भी रहा। रिपोर्ट के अनुसार, 2018 से 2024 के बीच स्मार्ट सिटी के कामों में करीब 75 करोड़ रुपये का गोलमाल मिला है।
स्मार्ट स्कूल: 5.91 करोड़ खर्च कर स्कूलों में कंप्यूटर और स्मार्ट बोर्ड लगाए गए, लेकिन बिजली का बिल न भरने के कारण ये उपकरण धूल फांक रहे हैं।
ई-बस और चार्जिंग: 4.85 करोड़ के चार्जिंग स्टेशन और ई-रिक्शा बिना इस्तेमाल के कबाड़ में तब्दील हो रहे हैं।
गलत भुगतान: ठेकेदारों को 19 करोड़ रुपये का एडवांस दिया गया, लेकिन अनुबंध खत्म होने के बाद भी यह रकम वसूल नहीं की जा सकी।
अधिकारियों की मनमानी: करंट अकाउंट में रखे करोड़ों, हुआ बड़ा नुकसान
कैग ने वित्तीय प्रबंधन पर भी उंगली उठाई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि परियोजना की भारी-भरकम राशि को बचत खाते (Saving Account) के बजाय करंट अकाउंट में रखा गया, जिससे सरकार को करीब 6.20 करोड़ रुपये के ब्याज का सीधा नुकसान हुआ। इसके अलावा, दून लाइब्रेरी और अन्य प्रोजेक्ट्स में अयोग्य विशेषज्ञों की तैनाती और जीएसटी के दोहरे दावों के नाम पर लाखों का अतिरिक्त भुगतान कर दिया गया।




