170KMpH की रफ्तार से टकराएगा तूफान अर्नब, अगले 13 घंटे में आएगी आफत

170KMpH की रफ्तार से टकराएगा तूफान अर्नब, अगले 13 घंटे में आएगी आफत

मौसम का मिजाज एक बार फिर बेहद भयावह और खतरनाक मोड़ लेने जा रहा है। भारत के विशाल तटीय और मैदानी इलाकों पर एक नया और अति विनाशकारी चक्रवाती तूफान 'अर्नब' (Cyclone Arnab) तेजी से मंडरा रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने बेहद गंभीर चेतावनी जारी करते हुए बताया है कि यह चक्रवात अगले 13 घंटों में तीव्र होकर भयानक रूप ले लेगा और करीब 170 किलोमीटर प्रति घंटे की तूफानी रफ्तार से तटों और मैदानी इलाकों से टकराएगा। इस भीषण प्राकृतिक खतरे को देखते हुए मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश और बिहार समेत देश के 10 से अधिक राज्यों में रेड और ऑरेंज अलर्ट घोषित कर दिया है। तटीय सुरक्षा एजेंसियों से लेकर राज्यों के आपदा प्रबंधन विभागों को हाई अलर्ट पर रखा गया है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति और जान-माल के बड़े नुकसान से बचा जा सके।

चक्रवात अर्नब का खौफनाक रूप और 170 किमी प्रति घंटे की तूफानी रफ्तार

मौसम वैज्ञानिकों की ताजा उपग्रहीय (Satellite) तस्वीरों और रडार आंकड़ों के मुताबिक, समुद्र में उठे कम दबाव के क्षेत्र ने अब एक बेहद शक्तिशाली चक्रवाती तूफान अर्नब का रूप धारण कर लिया है। वायुमंडल में अनुकूल परिस्थितियों और समुद्री सतह के उच्च तापमान के कारण यह चक्रवात लगातार शक्तिशाली होता जा रहा है। आईएमडी के महानिदेशक के अनुसार, जब यह तूफान तट से टकराएगा (Landfall), तो हवा की गति 150 से 170 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुँच सकती है। इतने प्रचंड वेग वाली हवाएं न केवल कच्चे मकानों, टीन की छतों और पेड़ों को उखाड़ फेंकने में सक्षम हैं, बल्कि बिजली के खंभों, टेलीकॉम टावरों और कमजोर पक्की इमारतों को भी भारी नुकसान पहुँचा सकती हैं। समुद्र में कई मीटर ऊंची लहरें उठने की आशंका जताई गई है, जिसके चलते मछुआरों को समुद्र तट से दूर रहने और तटवर्ती गांवों को तुरंत खाली कराने के सख्त निर्देश जारी किए गए हैं।

UP, बिहार और दिल्ली-NCR सहित 10 राज्यों में आईएमडी का हाई अलर्ट

आमतौर पर चक्रवाती तूफानों का असर केवल तटीय राज्यों तक सीमित रहता है, लेकिन चक्रवात अर्नब की व्यापकता और दिशा को देखते हुए इसका असर उत्तर और मध्य भारत के मैदानी इलाकों तक देखा जाएगा। आईएमडी ने उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) सहित 10 राज्यों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश (Extremely Heavy Rainfall) और आकाशीय बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया है। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र और बिहार के तटीय व मैदानी जिलों में अगले 24 से 48 घंटों के दौरान मूसलाधार बारिश और 70 से 90 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है। निचले इलाकों में जलभराव और नदियों के जलस्तर में अचानक उछाल आने का खतरा मंडरा रहा है, जिससे बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

अगले 13 घंटे क्यों हैं बेहद संवेदनशील और प्रशासन की क्या है तैयारी

मौसम विभाग की चेतावनी के अनुसार, अगले 13 घंटे पूरे देश के लिए बेहद नाजुक और संवेदनशील होने वाले हैं क्योंकि इसी दौरान चक्रवात अर्नब अपनी सबसे विनाशकारी अवस्था में पहुँचेगा। केंद्र सरकार और संबंधित राज्य सरकारों ने संभावित तबाही से निपटने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की दर्जनों टीमों को संवेदनशील इलाकों में तैनात कर दिया है। सेना और भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard) को भी आपातकालीन स्थिति के लिए तैयार रहने को कहा गया है। प्रभावित होने वाले जिलों में कंट्रोल रूम सक्रिय कर दिए गए हैं और स्कूलों तथा सरकारी संस्थानों में अस्थाई राहत शिविर (Relief Camps) बनाए गए हैं। जिला प्रशासनों ने नागरिकों से अपील की है कि वे अगले दो दिनों तक अकारण अपने घरों से बाहर न निकलें, पक्के मकानों में शरण लें और मौसम विभाग के अपडेट्स पर नजर बनाए रखें।

यातायात, उड़ानों और ट्रेनों पर भारी असर तथा खेती को संभावित नुकसान

चक्रवात अर्नब की भयावहता को देखते हुए नागरिक उड्डयन मंत्रालय और भारतीय रेलवे ने भी एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। तटीय और प्रभावित राज्यों की ओर जाने वाली कई लंबी दूरी की ट्रेनों को रद्द या उनके रूट डायवर्ट किए गए हैं, जबकि क्षेत्रीय हवाई अड्डों पर उड़ानों के आवागमन पर अस्थायी रोक लगाने की तैयारी है। खराब दृश्यता और तेज हवाओं के कारण सड़क यातायात के भी बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका है। इसके अतिरिक्त, कृषि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस बेमौसम और तूफानी बारिश के कारण उत्तर प्रदेश, बिहार और ओडिशा में तैयार खड़ी फसलों, सब्जियों और फलों के बगीचों को भारी नुकसान पहुँच सकता है। किसान भाइयों को सलाह दी गई है कि वे अपनी काटी गई फसलों को सुरक्षित स्थानों पर ढककर रखें और खेतों में जल निकासी की त्वरित व्यवस्था करें ताकि आर्थिक नुकसान को न्यूनतम किया जा सके।