धर्मनगरी हरिद्वार में मौसम का अचानक बदला मिजाज, आसमान से आफत बनकर बरसे बड़े-बड़े ओले
देवभूमि उत्तराखंड के प्रवेश द्वार और दुनिया भर में अपनी आध्यात्मिक और धार्मिक पहचान के लिए प्रसिद्ध पावन नगरी हरिद्वार में अचानक एक ऐसा प्राकृतिक नजारा देखने को मिला, जिसने शहरवासियों को पूरी तरह से हैरान और सहमा कर रख दिया। पिछले कुछ दिनों से लगातार बढ़ रही उमस और गर्मी के बीच शुक्रवार की दोपहर अचानक मौसम का मिजाज ऐसा पलटा कि आसमान में काले-घने बादलों का डेरा लग गया और देखते ही देखते तेज गर्जना के साथ ओलावृष्टि शुरू हो गई। यह कोई आम ओलावृष्टि नहीं थी, बल्कि आसमान से गोल्फ की गेंद और नींबू से भी बड़े आकार के ओले धड़ाम-धड़ाम नीचे गिरने लगे, जिन्हें देखकर लोगों की सांसें अटक गईं। प्रकृति के इस अचानक और आक्रामक रूप को देखकर सड़कों पर चल रहे राहगीर और बाजारों में खरीदारी कर रहे लोग अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों और दुकानों के शेड के नीचे छिपने को मजबूर हो गए। कुछ ही मिनटों की इस भयंकर ओलावृष्टि ने पूरे शहर की रफ्तार को थाम दिया और चारों तरफ सफेद ओलों की एक ऐसी चादर बिछ गई मानो पहाड़ों पर भारी बर्फबारी हो गई हो।
सड़क पर खड़े वाहनों के टूटे शीशे और एहतियात के तौर पर मची अफरा-तफरी
इस अप्रत्याशित और भीषण ओलावृष्टि के दौरान सबसे अधिक नुकसान खुले आसमान के नीचे पार्क की गई गाड़ियों और दोपहिया वाहनों को उठाना पड़ा, जिन पर जब ये बड़े-बड़े ओले गिरे तो उनके कांच चकनाचूर हो गए। कई कार मालिकों की गाड़ियों की विंडशील्ड और साइड ग्लास पूरी तरह से टूट गए, जिसे देखकर वाहन चालकों के सिर पर चिंता की लकीरें खींच गईं। शहर के मुख्य चौराहों और बाजारों में अचानक मची इस अफरा-तफरी के कारण कुछ पलों के लिए यातायात भी बाधित हो गया, क्योंकि ओलों की रफ्तार इतनी तेज थी कि यदि कोई वाहन के बाहर होता तो उसे गंभीर चोट लग सकती थी। स्थानीय दुकानदारों और निवासियों ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन में पहली बार हरिद्वार जैसे मैदानी-पहाड़ी क्षेत्र में इतने बड़े आकार के ओले गिरते हुए देखे हैं। लोग अपनी-अपनी छतों और खिड़कियों से इस अनोखे लेकिन डरावने मौसम को अपने कैमरों में कैद करने लगे, हालांकि कई जगहों पर कच्चे मकानों की छतों और टीन-शेड को भी इस प्राकृतिक मार से हल्का नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आई हैं।
मौसम विभाग की चेतावनी और जलवायु परिवर्तन का असर, फसलों को पहुंचा भारी नुकसान
मौसम वैज्ञानिकों का यह मानना है कि ऊपरी वायुमंडल में अचानक बने कम दबाव के क्षेत्र और जेट स्ट्रीम के प्रभाव के कारण इस तरह की स्थानीय लेकिन बेहद तीव्र मौसमी घटनाएं सामने आ रही हैं। हरिद्वार और उसके आसपास के ग्रामीण इलाकों में खेतों में खड़ी सब्जियों, पकी हुई फसलों और बागवानी को इस बेमौसम और भारी ओलावृष्टि से काफी अधिक नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है, जिससे किसान काफी चिंतित नजर आ रहे हैं। किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फिरता देख अन्नदाताओं के चेहरों पर मायछा छा गई है, क्योंकि इस प्रकार के अचानक मौसम के बदलाव से फसलों की कटाई के समय भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ती है। स्थानीय प्रशासन और कृषि विभाग की टीमों को यह निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर हुए नुकसान का आकलन करें ताकि किसानों को उचित मुआवजा दिलाया जा सके। ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु संतुलन में आ रहे निरंतर बदलावों का ही यह परिणाम है कि अब मैदानी इलाकों में भी इस तरह की चरम मौसमी आपदाएं बार-बार देखने को मिल रही हैं।
स्थिति सामान्य होने की ओर बढ़ रहा है शहर, प्रशासन की अपील- खराब मौसम में रहें सतर्क
कुछ घंटों तक चली इस प्राकृतिक उठापटक के बाद धीरे-धीरे आसमान साफ होने लगा और धूप खिलने के साथ ही शहर की जिंदगी वापस अपनी पटरी पर लौटने लगी। नगर निगम और पुलिस प्रशासन ने स्थिति का जायजा लेते हुए नागरिकों से अपील की है कि जब भी इस प्रकार के खराब मौसम की चेतावनी हो, तो वे अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचें और सुरक्षित स्थानों पर रहें। हरिद्वार आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को भी मौसम के इस मिजाज को ध्यान में रखते हुए अपनी यात्रा की योजना बनाने की सलाह दी गई है। अंततः, प्रकृति ने एक बार फिर से अपनी ताकत का अहसास कराते हुए यह बता दिया है कि हम इंसानों के लिए पर्यावरण संरक्षण और जलवायु बदलावों पर गंभीरता से विचार करना कितना आवश्यक हो गया है, अन्यथा इस तरह की आफतें आगे भी हमारा इम्तिहान लेती रहेंगी।