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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : बिहार के शहरी प्रशासन में बदलाव की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। उपमुख्यमंत्री और राजस्व‑भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने राज्य के 264 नगर निकायों में सरकारी जमीन पर कब्जा करने वाले भू‑माफिया और अनियमितताओं से निपटने के निर्देश दिए हैं, ताकि शहरी विकास योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे।

शहरी निकायों में जमीन से जुड़े कई मामले पहले भी सुर्खियों में रहे हैं, जहां अवैध कब्जे और गलत तरीके से टेंडर दिए जाने की शिकायतें मिली हैं। इन पर अब सख्ती से कार्रवाई की योजना बनाई जा रही है। अधिकारियों को कहा गया है कि वे भूमि और भूमि से जुड़ी शिकायतों को प्राथमिकता से हल करें और किसी भी तरह के इधर‑उधर लेखों को बर्दाश्त न करें।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि भूमि और जमीन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अधिकारी जनता से सीधे संवाद भी करेंगे। शिकायतों पर तय समय सीमा में काम पूरा करना अब प्रशासन के लिए जरूरी होगा, जिससे पहले की तरह फाइलें दबने या लंबित रहने की स्थिति न कायम रहे। 

इस पहल के पीछे उद्देश्य यह है कि शहरी निकायों में सरकारी योजनाएं निर्बाध रूप से आगे बढ़ सकें और शहरों की बुनियादी सुविधाओं को उन्नत किया जा सके। भूमि से जुड़े विवादों के कारण कई परियोजनाएं अटक जाती हैं, और इससे छोटे उद्योगों और कारोबारियों को भी नुकसान होता है। इसलिए प्रशासन की कोशिश है कि ऐसे मामले शीघ्र और प्रभावी ढंग से निपटें। 

भूमि माफिया के खिलाफ यह रवैया पिछले कुछ समय से सरकार की प्राथमिकता में रहा है। भूमि सुधार जनकल्याण संवाद कार्यक्रम के तहत अधिकारियों को बताया गया था कि भू‑माफिया और राजस्व सेवकों के बीच गठजोड़ को लोकतंत्र और सुशासन के हित में तोड़ना जरूरी है। अगले 100 दिनों में सभी जिलों में ऐसे संवाद चलाने की योजना भी है, जिससे आम लोग सीधे अपनी समस्याएं साझा कर सकें। 

अगर यह पहल सफल होती है, तो न सिर्फ भूमि विवादों का समाधान आसान होगा, बल्कि छोटे उद्योगों और व्यापारों को भी आगे बढ़ने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही अतिक्रमण के खिलाफ बुलडोज़र अभियान जैसे कदमों से शहरी क्षेत्रों में नियम‑कानून लागू होने की भावना मजबूत होगी।