Prabhat Vaibhav,Digital Desk : अक्सर स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग सफेद चीनी के बजाय ब्राउन शुगर (भूरी चीनी) को एक स्वस्थ विकल्प मानते हैं। लेकिन क्या वाकई रंग बदलने से इसके गुण बदल जाते हैं? विशेष रूप से मधुमेह (Diabetes) के मरीजों के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि इन दोनों में से कौन सा विकल्प उनके रक्त शर्करा (Blood Sugar) के स्तर के लिए सुरक्षित है। आइए समझते हैं इनके बीच का वैज्ञानिक अंतर।
कैसे बनती हैं सफेद और भूरी चीनी?
सफेद और भूरी चीनी, दोनों का मुख्य स्रोत गन्ना ही है। मुख्य अंतर इनके प्रसंस्करण (Processing) के तरीके में होता है:
सफेद चीनी (White Sugar): यह पूरी तरह परिष्कृत (Refined) होती है। प्रोसेसिंग के दौरान इससे 'शीरा' या गुड़ (Molasses) पूरी तरह निकाल दिया जाता है, जिससे यह सफेद और गंधहीन हो जाती है।
ब्राउन शुगर (Brown Sugar): जब सफेद चीनी में दोबारा 4 से 10% तक गुड़ या शीरा मिलाया जाता है, तो वह ब्राउन शुगर बन जाती है। इसी गुड़ के कारण इसमें हल्का कैरेमल जैसा स्वाद और नमी होती है।
पोषक तत्वों का सच: क्या ब्राउन शुगर में विटामिन हैं?
मीडिया रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों के अनुसार, सफेद और भूरी चीनी के पोषण मूल्य (Nutritional Value) में कोई खास अंतर नहीं होता। हालांकि ब्राउन शुगर में गुड़ की मौजूदगी के कारण कैल्शियम, पोटेशियम और आयरन की बहुत मामूली मात्रा होती है, लेकिन यह इतनी कम होती है कि शरीर पर इसका कोई सकारात्मक स्वास्थ्य प्रभाव नहीं पड़ता। कैलोरी के मामले में भी दोनों लगभग बराबर ही हैं।
डायबिटीज के मरीजों के लिए कौन सी सुरक्षित?
अगर आप मधुमेह के रोगी हैं और चाय-कॉफी में सफेद चीनी की जगह ब्राउन शुगर का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो सावधान हो जाएं। विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि ब्राउन शुगर का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) भी सफेद चीनी के समान ही ऊंचा होता है। इसे खाने से भी रक्त शर्करा का स्तर उतनी ही तेजी से बढ़ता है। इसलिए, मधुमेह रोगियों के लिए ब्राउन शुगर का सेवन सफेद चीनी जितना ही हानिकारक हो सकता है।
स्वाद और रंग का खेल
ब्राउन शुगर मुख्य रूप से बेकिंग (जैसे कुकीज और केक) में नमी और खास रंग देने के लिए इस्तेमाल की जाती है। यदि आप इसे केवल सेहतमंद मानकर खा रहे हैं, तो यह एक भ्रम (Myth) है। स्वास्थ्य की दृष्टि से दोनों का प्रभाव शरीर पर एक जैसा ही पड़ता है।




