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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर सर्वाइकल कैंसर एक ऐसी चुनौती है जिसे अक्सर जानकारी के अभाव में नजरअंदाज कर दिया जाता है। स्तन कैंसर के बाद यह भारत में महिलाओं के बीच दूसरा सबसे आम कैंसर है। हालांकि, राहत की बात यह है कि अगर समय रहते सही कदम उठाए जाएं, तो इसे न केवल रोका जा सकता है बल्कि पूरी तरह ठीक भी किया जा सकता है। यह कैंसर मुख्य रूप से 'ह्यूमन पैपिलोमा वायरस' (HPV) के लंबे समय तक संक्रमण के कारण होता है। आइए जानते हैं इस बीमारी से जुड़े कुछ ऐसे महत्वपूर्ण सवाल-जवाब जो हर महिला और उसके परिवार के लिए जानना बेहद जरूरी है।

क्या है सर्वाइकल कैंसर और इसकी मुख्य वजह?

सर्वाइकल कैंसर गर्भाशय के निचले हिस्से (S cervix) की कोशिकाओं में पनपता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसका सबसे बड़ा कारण 'ह्यूमन पैपिलोमा वायरस' (HPV) है, जो एक सामान्य यौन संचारित संक्रमण है। ज्यादातर मामलों में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता इस वायरस से लड़ लेती है, लेकिन कुछ महिलाओं में यह वायरस वर्षों तक बना रहता है, जो धीरे-धीरे स्वस्थ कोशिकाओं को कैंसर कोशिकाओं में बदल देता है। इसके अलावा कम उम्र में शादी, कमजोर इम्यूनिटी और साफ-सफाई की कमी भी इसके जोखिम को बढ़ा देती है।

क्या इस गंभीर बीमारी से बचाव संभव है?

जी हाँ, सर्वाइकल कैंसर उन चंद कैंसरों में से एक है जिसे टीकाकरण (Vaccination) के जरिए रोका जा सकता है। एचपीवी वैक्सीन लड़कियों को कम उम्र में देने की सलाह दी जाती है ताकि वे भविष्य में इस खतरे से सुरक्षित रह सकें। इसके साथ ही, महिलाओं को नियमित अंतराल पर 'पैप स्मियर' (Pap Smear) और एचपीवी डीएनए टेस्ट करवाते रहना चाहिए। ये टेस्ट कैंसर के विकसित होने से बहुत पहले ही असामान्य कोशिकाओं की पहचान कर लेते हैं, जिससे इलाज बेहद आसान और प्रभावी हो जाता है।

लक्षणों को पहचानना क्यों है जरूरी?

सर्वाइकल कैंसर के शुरुआती लक्षण अक्सर स्पष्ट नहीं होते, इसीलिए इसे 'साइलेंट किलर' कहा जाता है। हालांकि, असामान्य रक्तस्राव, पीरियड्स के बीच में ब्लीडिंग, संबंध बनाने के बाद दर्द या ब्लीडिंग और पीठ के निचले हिस्से में लगातार दर्द जैसे संकेतों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि इनमें से कोई भी लक्षण बार-बार महसूस हो, तो तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynecologist) से सलाह लेनी चाहिए। याद रखें कि समय पर पहचान ही इस बीमारी के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है।

जागरूकता ही है सबसे बड़ी सुरक्षा

भारत सरकार और कई स्वास्थ्य संगठन अब सर्वाइकल कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चला रहे हैं। सही खान-पान, सुरक्षित जीवनशैली और समय पर स्क्रीनिंग के माध्यम से इस बीमारी के आंकड़ों को कम किया जा सकता है। महिलाओं को अपनी सेहत को प्राथमिकता देनी चाहिए और बिना किसी हिचकिचाहट के इस विषय पर बात करनी चाहिए। कैंसर से डरने के बजाय उससे लड़ना और सावधान रहना ही समझदारी है।