सेशेल्स के अल्दाब्रा एटोल में विशालकाय कछुओं की संख्या ने तोड़े सभी रिकॉर्ड
धरती पर वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण संतुलन को लेकर जब भी कोई सकारात्मक और सुखद खबर सामने आती है, तो वह पूरी दुनिया के प्रकृति प्रेमियों के चेहरे पर मुस्कान ले आती है। इसी कड़ी में हिंद महासागर में स्थित खूबसूरत द्वीपीय देश सेशेल्स से एक बेहद हैरान करने वाली और ऐतिहासिक रिपोर्ट सामने आई है, जिसने जीव विज्ञानियों को भी उत्साह से भर दिया है। यहां के सुदूर और संरक्षित 'अल्दाब्रा एटोल' (Aldabra Atoll) क्षेत्र में वैज्ञानिकों द्वारा हाल ही में किए गए व्यापक सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है कि दुनिया में मुक्त रूप से विचरण करने वाले सबसे विशालकाय कछुओं (Giant Tortoises) की आबादी में जबरदस्त उछाल आया है। दशकों चले कड़े संरक्षण प्रयासों, शिकार पर पूर्ण प्रतिबंध और उनके प्राकृतिक आवास की सुरक्षा के चलते इन अद्भुत और लंबे समय तक जीवित रहने वाले जीवों की संख्या बढ़कर अब लगभग 1,80,000 के आंकड़े को पार कर चुकी है। किसी एक ही द्वीप समूह पर इतनी बड़ी संख्या में इन विशाल कछुओं का फलना-फूलना यह साबित करता है कि यदि इंसान थोड़ी सी इच्छाशक्ति दिखाए, तो संकट में पड़ी प्रजातियों को भी पुनर्जीवित किया जा सकता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सेशेल्स दौरे के दौरान इन विशाल जीवों के दीदार की चर्चा रही खास
इन खूबसूरत और विशालकाय अल्दाब्रा कछुओं का भारत के साथ भी एक बेहद गहरा और आत्मीय कूटनीतिक संबंध रहा है, जिसने समय-समय पर दोनों देशों के रिश्तों को प्रगाढ़ किया है। कुछ समय पूर्व जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने आधिकारिक दौरे पर सेशेल्स पहुंचे थे, तो उनके इस दौरे का एक बहुत ही खूबसूरत और चर्चित हिस्सा वहां के नेशनल बॉटनिकल गार्डन्स में इन विशाल कछुओं से मिलना भी रहा था। पीएम मोदी ने वहां इन दुर्लभ और लंबी उम्र वाले जीवों के साथ कुछ पल बिताए थे और उनके संरक्षण के तौर-तरीकों का जायजा लिया था। भारत और सेशेल्स की दोस्ती के प्रतीक के तौर पर सेशेल्स सरकार द्वारा अतीत में कोलकाता के अलीपुर चिड़ियाघर और हैदराबाद जू को भी ये विशेष कछुए उपहार स्वरूप सौंपे जा चुके हैं, जो दोनों देशों के बीच वन्यजीव एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान की अनूठी मिसाल पेश करते हैं। प्रधानमंत्री द्वारा इन जीवों में दिखाई गई रुचि के बाद से भारत में भी इन विशालकाय कछुओं और उनके पर्यावास को लेकर आम लोगों के बीच काफी उत्सुकता बढ़ गई है।
कैसे संभव हुआ यह चमत्कार? दशकों के कड़े संरक्षण और निगरानी का मिला अद्भुत परिणाम
किसी जमाने में विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुके इन अल्दाब्रा कछुओं की आबादी का इस तरह से 1.80 लाख तक पहुंच जाना रातों-रात हुआ कोई चमत्कार नहीं है, बल्कि इसके पीछे पर्यावरणविदों और अंतरराष्ट्रीय संरक्षण संस्थाओं की कई दशकों की कड़ी मेहनत छिपी है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस एटोल को इंसानी दखलअंदाजी से पूरी तरह सुरक्षित रखा गया, जिससे इन जीवों को अपने प्राकृतिक माहौल में प्रजनन करने और फलने-फूलने का खुला अवसर मिला। हालांकि, इस बीच जलवायु परिवर्तन, लंबे समय तक चलने वाले सूखे और समुद्र के जलस्तर में हो रही वृद्धि जैसी कुछ नई चुनौतियां जरूर सामने आ रही हैं, जो इन विशाल जीवों के लिए भविष्य में संकट पैदा कर सकती हैं। इसके बावजूद, हालिया सर्वे के आंकड़े यह उम्मीद जगाते हैं कि यदि समय रहते एहतियाती कदम उठाए जाते रहें, तो प्रकृति अपने संतुलन को खुद-ब-खुद बनाए रखने की अद्भुत क्षमता रखती है।
भविष्य की चुनौतियां और ग्लोबल वार्मिंग के साये में इन जीवों की जीवन रक्षा का संकल्प
अल्दाब्रा के इन विशाल कछुओं की यह बढ़ती आबादी भले ही आज पर्यावरणविदों के लिए जश्न मनाने का मौका हो, लेकिन वैज्ञानिक यह चेतावनी भी दे रहे हैं कि आने वाले दिनों में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से इनके आश्रय स्थलों पर असर पड़ सकता है। तापमान बढ़ने और प्राकृतिक स्रोतों के प्रभावित होने से इनकी जीवनशैली पर भी विपरीत प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है, जिस पर अभी से नजर रखने की जरूरत है। दुनिया भर के शोधकर्ता अब इस बात पर जोर दे रहे हैं कि इन कछुओं की संख्या का यह नया आंकड़ा सिर्फ एक पड़ाव है, बल्कि हमें इनके दीर्घावकालिक अस्तित्व के लिए लगातार काम करते रहना होगा। अंततः, दुनिया के सबसे विशाल इन कछुओं का इस तरह से अपनी खोई हुई आबादी को वापस पाना इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि यदि पृथ्वी के हर जीव के अधिकार और उसकी रक्षा का संकल्प लिया जाए, तो प्रकृति हमें निराश नहीं करती है।