सऊदी रक्षा मंत्रालय पर मिसाइल हमले का दावा, हूतियों ने कहा- सीधे निशाने पर लगी, तेल रिफाइरी भी तबाह
सऊदी अरब और यमन के बीच जारी तनाव के बीच एक बेहद सनसनीखेज और चिंताजनक खबर सामने आ रही है। यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने दावा किया है कि उन्होंने सऊदी अरब की राजधानी रियाद स्थित रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defense) और देश की प्रमुख तेल रिफाइनरी को निशाना बनाकर बड़ा बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमला किया है। हूती सैन्य प्रवक्ता के मुताबिक, यह हमला पूरी तरह से सटीक और सफल रहा, जिसमें सऊदी रक्षा मंत्रालय के प्रशासनिक परिसरों के साथ-साथ एक महत्वपूर्ण तेल रिफाइनरी को भारी नुकसान पहुँचा है। इस अचानक हुए हमले से पूरे मध्य पूर्व (Middle East) में हड़कंप मच गया है और वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों से लेकर अंतर्राष्ट्रीय कूटनीतिक गलियारों तक में चिंता की लहर दौड़ गई है।
हूती विद्रोहियों का आधिकारिक बयान और दावों की सच्चाई
यमन के हूती सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर याह्या सारी ने एक टेलीविजन बयान जारी करते हुए इस बड़े हमले की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हूती सेना ने 'ऑपरेशन फतह' (Victory Operation) के तहत लंबी दूरी की उन्नत बैलिस्टिक मिसाइलों और कई आत्मघाती हमलावर ड्रोनों का एक साथ इस्तेमाल किया। उन्होंने दावा किया कि मिसाइलों ने रियाद स्थित सऊदी रक्षा मंत्रालय की इमारत पर सीधे सटीक निशाना साधा और परिसर में भारी तबाही मचाई। इसके साथ ही, एक अन्य समन्वित हमले में सऊदी अरब की एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण तेल रिफाइनरी को निशाना बनाया गया, जिससे वहाँ भीषण आग लग गई और शोधन कार्य अस्थायी रूप से बाधित हो गया। हूती प्रवक्ता ने चेतावनी दी है कि जब तक सऊदी अरब यमन पर अपनी सैन्य कार्रवाई और आर्थिक नाकाबंदी पूरी तरह से बंद नहीं करता, तब तक सऊदी अरब के आर्थिक, सैन्य और बुनियादी ढाँचे वाले क्षेत्रों पर ऐसे विनाशकारी हमले जारी रहेंगे।
सऊदी रक्षा मंत्रालय और अरामको रिफाइनरी की सुरक्षा पर सवाल
सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय और उसकी विशाल तेल संपत्तियों को दुनिया की सबसे मजबूत और आधुनिक वायु रक्षा प्रणालियों (Air Defense Systems) का संरक्षण प्राप्त है। इस हमले के बाद अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा विश्लेषक और सैन्य विशेषज्ञ इस बात पर अचंभित हैं कि हूती मिसाइलें और ड्रोन इतनी कड़े सुरक्षा घेरे को भेदकर देश के सबसे संवेदनशील सैन्य मुख्यालय और तेल सुविधाओं तक कैसे पहुँचे। हालांकि सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय या सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन की ओर से इस हमले के नुकसान का आधिकारिक तौर पर विस्तृत ब्योरा जारी किया जाना बाकी है, लेकिन रियाद और तटीय इलाकों के आसपास से आ रही अपुष्ट तस्वीरों व वीडियो में धुएँ के गुबार और सुरक्षा बलों की अचानक बढ़ती हलचल देखी गई है। सऊदी अरब की वायु रक्षा प्रणाली ने अतीत में कई मिसाइलों को हवा में ही मार गिराने में सफलता हासिल की है, लेकिन इस बार हूती संगठन द्वारा किए गए इस बहु-आयामी (Multi-directional) हमले ने रियाद के रक्षा तंत्र को कड़ी चुनौती दी है।
वैश्विक तेल बाज़ारों और ऊर्जा आपूर्ति पर गहराता संकट
सऊदी अरब दुनिया का सबसे बड़ा कच्चा तेल निर्यातक देश है, और उसकी किसी भी रिफाइनरी या तेल प्रसंस्करण संयंत्र पर हमला सीधे तौर पर वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है। जैसे ही हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी तेल रिफाइनरी के तबाह होने की खबर अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में फैली, वैश्विक बाज़ार में कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमतों में एकाएक उछाल दर्ज किया गया। ऊर्जा बाज़ार के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस हमले से तेल शोधन क्षमता या निर्यात बुनियादी ढाँचे को दीर्घकालिक नुकसान पहुँचता है, तो आने वाले दिनों में भारत सहित दुनिया भर में पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन (ATF) की कीमतों में भारी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। तेल रिफाइनरियों पर खतरे ने न केवल मध्य पूर्व के तेल आपूर्ति नेटवर्क को अस्थिर किया है बल्कि यूरोपीय और एशियाई देशों की ऊर्जा सुरक्षा पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं
इस हमले ने मध्य पूर्व क्षेत्र में पहले से ही नाजुक बने शक्ति संतुलन को और अधिक खतरनाक मोड़ पर ला खड़ा किया है। संयुक्त राष्ट्र (UN), संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय संघ (EU) ने नागरिक बुनियादी ढाँचे और ऊर्जा सुविधाओं पर होने वाले इस प्रकार के हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का मानना है कि यमन संघर्ष को बातचीत और कूटनीति के माध्यम से हल करने के प्रयासों को ऐसे हमलों से गहरा झटका लगता है। वहीं दूसरी ओर, सऊदी अरब द्वारा इस हमले का करारा जवाब दिए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि सऊदी वायु सेना आने वाले घंटों में यमन की राजधानी साना और हूती बहुल क्षेत्रों में स्थित मिसाइल लॉन्च पैड्स व गोला-बारूद के गोदामों पर जवाबी हवाई हमले शुरू कर सकती है, जिससे इस क्षेत्र में एक बार फिर पूर्ण युद्ध जैसी स्थिति पैदा होने की आशंका बढ़ गई है।