तानाशाही का नया चैप्टर: 'अब देश में कभी नहीं होंगे चुनाव, मैं और पत्नी ही रहेंगे को-प्रेसिडेंट', इस दिग्गज नेता के ऐलान से दुनिया हैरान
वैश्विक राजनीति में एक ऐसा भूचाल आया है जिसने लोकतांत्रिक मूल्यों पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। मध्य अमेरिकी देश निकारागुआ (Nicaragua) के लंबे समय से राष्ट्रपति पद पर काबिज डैनियल ओर्टेगा (Daniel Ortega) ने एक जनसभा में खुलेआम एलान कर दिया है कि अब उनके देश में भविष्य में कभी भी चुनाव (Elections) नहीं कराए जाएंगे। 80 वर्षीय ओर्टेगा ने साफ शब्दों में कहा कि वह अपनी पत्नी रोसारियो मुरिलो (Rosario Murillo), जिन्हें उन्होंने पहले ही 'को-प्रेसिडेंट' (सह-राष्ट्रपति) घोषित किया हुआ है, के साथ मिलकर जीवनभर सत्ता संभालेंगे और विपक्ष को कभी मौका नहीं देंगे। इस अप्रत्याशित घोषणा ने संयुक्त राष्ट्र (UN) से लेकर अमेरिका तक, पूरी दुनिया को स्तब्ध कर दिया है。
विपक्षी पार्टियों का पत्ता पूरी तरह साफ
सैंडिनिस्टा क्रांति की वर्षगांठ के मौके पर दिए अपने आक्रामक भाषण में ओर्टेगा ने कहा कि अब वह दिन लद गए जब विदेशी ताकतों या अमेरिका समर्थित दल देश की सत्ता पर कब्जा करने का सपना देखते थे। उन्होंने सीधे तौर पर चेतावनी दी, "अब यहां सरकार और सत्ता हथियाने के लिए किसी भी तरह के चुनाव नहीं होंगे"। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ओर्टेगा का यह कदम निकारागुआ को पूरी तरह से एक 'पारिवारिक तानाशाही' (Family-run Dictatorship) में बदलने की आधिकारिक मुहर है, जहां जनता की आवाज को हमेशा के लिए दबा दिया गया है।
पत्नी को पहले ही बना चुके हैं 'सह-राष्ट्रपति'
यह पहली बार नहीं है जब डैनियल ओर्टेगा ने अपने ऐसे सनकी फैसलों से दुनिया को हैरान किया हो। साल 2007 से लगातार निकारागुआ की सत्ता संभाल रहे ओर्टेगा ने पिछले साल ही देश के संविधान में बड़े बदलाव किए थे। इन संशोधनों के तहत उन्होंने अपनी पत्नी रोसारियो मुरिलो को देश का 'को-प्रेसिडेंट' नियुक्त कर दिया था और राष्ट्रपति के कार्यकाल को बढ़ाकर छह साल कर दिया था। वर्तमान में ओर्टेगा और उनकी पत्नी का देश की सेना, पुलिस और न्यायपालिका पर पूरी तरह से नियंत्रण है, जिसके चलते वहां किसी भी तरह का विरोध करना सीधे जेल का रास्ता खोलता है।
मानवाधिकार संगठन और अमेरिका सख्त, पाबंदियों की तैयारी
ओर्टेगा के इस एलान के बाद संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने निकारागुआ को एक पूर्ण सत्तावादी और दमनकारी राज्य घोषित कर दिया है, जहां मानवाधिकारों का लगातार हनन हो रहा है। अमेरिकी प्रशासन भी इस तानाशाही रुख को लेकर सख्त नजर आ रहा है। अमेरिका पहले ही निकारागुआ के हजारों अधिकारियों पर कड़े प्रतिबंध लगा चुका है और अब इस नए ऐलान के बाद वैश्विक स्तर पर निकारागुआ को अलग-थलग करने और नई आर्थिक पाबंदियां लगाने की रणनीति तैयार की जा रही है।