अंतरिक्ष की असीम गहराइयों और आर्बिट में मंडरा रहा अदृश्य और खतरनाक खतरा

अंतरिक्ष की असीम गहराइयों और आर्बिट में मंडरा रहा अदृश्य और खतरनाक खतरा

आज के इस आधुनिक वैज्ञानिक युग में जहां पूरी दुनिया अंतरिक्ष अनुसंधान, उपग्रहों के प्रक्षेपण और अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में नित नए मील के पत्थर स्थापित कर रही है, वहीं दूसरी तरफ अंतरिक्ष में बढ़ता हुआ कचरा यानी 'स्पेस डिब्रिस' (Space Debris) दुनिया भर के वैज्ञानिकों के लिए एक गंभीर सिरदर्द बनता जा रहा है। पिछले कुछ दशकों में अंतरिक्ष में छोड़े गए हजारों उपग्रहों के अवशेष, उनके टूटे हुए हिस्से और बेकार हो चुके रॉकेट के टुकड़े पृथ्वी की कक्षाओं में अत्यधिक उच्च गति के साथ चक्कर काट रहे हैं, जो किसी भी समय चालू हालत के अंतरिक्षीय यानों और सैटेलाइट्स के लिए मौत का परवाना बन सकते हैं। हाल ही में इस अदृश्य खतरे का एक बेहद खौफनाक और चौंकाने वाला वाकया हमारे पड़ोसी देश बांग्लादेश के अंतरिक्ष कार्यक्रम के साथ सामने आया, जब उसका पहला गौरवशाली उपग्रह अंतरिक्ष में एक बड़ी तबाही का शिकार होते-होते बाल-बाल बचा। यदि समय रहते अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसियों और ट्रैकिंग सिस्टम्स द्वारा सटीक चेतावनी जारी नहीं की जाती, तो यह टक्कर इतनी भयानक होती कि बांग्लादेश का वह बहुमूल्य अंतरिक्ष मिशन पलभर में मलबे के ढेर में तब्दील हो जाता और उन्हें भारी-भरकम आर्थिक एवं तकनीकी नुकसान उठाना पड़ता।

बंगबंधु-1 उपग्रह और भारतीय सैटेलाइट के मलबे के बीच मंडरा रहा था भीषण टकराव का साया

मिली जानकारी के अनुसार, बांग्लादेश के पहले कम्युनिकेटिंग सैटेलाइट 'बंगबंधु-1' (Bangabandhu-1) को उसकी निर्धारित जियोसिंक्रोनस कक्षा में स्थापित किया गया था, जहाँ वह लगातार अपनी सेवाएं दे रहा था। लेकिन कुछ ही दिन पहले अंतरिक्ष की गतिविधियों पर नजर रखने वाली ग्लोबल रडार प्रणालियों और अंतरिक्ष निगरानी तंत्र ने यह चौंकाने वाला संकेत दिया कि इस उपग्रह के ठीक उसी मार्ग पर अंतरिक्ष में तैर रहा कचरा तेजी से आगे बढ़ रहा है। जांच करने पर यह बात सामने आई कि वह मलबा किसी और का नहीं बल्कि अंतरिक्ष में पहले से मौजूद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) या अन्य भारतीय अभियानों से जुड़े एक पुराने सैटेलाइट का एक बचा हुआ हिस्सा था, जो आर्बिट में अनियंत्रित गति से घूम रहा था। दोनों वस्तुओं की गति इतनी तीव्र थी कि यदि वे आपस में टकरा जातीं, तो ऊर्जा का वह विस्फोट और हजारों छोटे टुकड़ों का फैल जाना अंतरिक्ष में एक और बड़ी श्रंखलाबद्ध तबाही को जन्म दे सकता था। इस आसन्न खतरे की भनक लगते ही अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के माथे पर पसीने आ गए क्योंकि एक छोटी सी चूक पूरे मिशन को हमेशा के लिए समाप्त कर सकती थी।

समय रहते अपनाए गए आपातकालीन मैन्यूवर और कड़े तकनीकी कदम, ऐसे टली बड़ी आपदा

इस संभावित और भीषण अंतरिक्ष दुर्घटना को टालने के लिए तुरंत प्रभाव से आपातकालीन प्रोटोकॉल सक्रिय किए गए और दुनिया भर की अंतरिक्ष एजेंसियों ने मिलकर काम करना शुरू किया। बंगबंधु-1 उपग्रह के संचालन और नियंत्रण कक्ष के इंजीनियरों ने ट्रैकिंग डेटा का बारीकी से अध्ययन करने के बाद उपग्रह के ऑन-बोर्ड थ्रस्टर्स (Thrusters) को चालू करने का एक जोखिम भरा लेकिन जरूरी निर्णय लिया। अंतरिक्ष में उपग्रह की कक्षा या उसके पथ में थोड़ा सा बदलाव करना बेहद नपे-तुले गणित का काम होता है, क्योंकि जरा सी भी गड़बड़ी से सैटेलाइट का संपर्क हमेशा के लिए कट सकता है। कुशल वैज्ञानिकों और अत्याधुनिक एल्गोरिदम की मदद से उपग्रह के थ्रस्टर्स को कुछ सेकंड के लिए दागा गया, जिससे उसकी स्थिति और ऊंचाई में मामूली लेकिन सुरक्षित परिवर्तन कर दिया गया। इस सटीक 'कॉलिजन अवॉइडेंस मैन्यूवर' (Collision Avoidance Maneuver) के कारण भारतीय उपग्रह का वह पुराना मलबा बंगबंधु-1 के बिल्कुल पास से सुरक्षित दूरी बनाते हुए बिना किसी नुकसान के गुजर गया, और इस तरह अंतरिक्ष में होने वाला एक बड़ा हादसा टल गया।

अंतरिक्ष के बढ़ते कचरे पर वैश्विक चिंता, भविष्य के अभियानों के लिए एक बड़ी चेतावनी

यह पूरी घटना केवल एक देश या एक सैटेलाइट के बाल-बाल बचने की कहानी नहीं है, बल्कि यह पूरी मानवता और अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े वैज्ञानिकों के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि यदि अंतरिक्ष कचरे के प्रबंधन पर जल्द ही कोई ठोस अंतरराष्ट्रीय कानून या सफाई अभियान नहीं चलाया गया, तो आने वाले समय में पृथ्वी की कक्षाएं मलबे का अखाड़ा बन जाएंगी। अंतरिक्ष में हर देश अपने उपग्रह स्थापित कर रहा है, जिससे भीड़भाड़ इतनी बढ़ गई है कि हर हफ्ते इस तरह के नियर-मिस (Near-miss) यानी बाल-बाल बचने के मामले सामने आते रहते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों में ऐसे स्वतः निर्देशित सिस्टम अनिवार्य होने चाहिए जो बिना इंसानी हस्तक्षेप के खुद ही अंतरिक्ष के मलबे को भांपकर अपनी दिशा बदल सकें। अंततः, इस बार तो बांग्लादेश का पहला सैटेलाइट एक बड़ी आपदा से सुरक्षित बच निकला, लेकिन यह वाकया हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि अंतरिक्ष की अनंत गहराइयों को भी अब कचरा मुक्त रखने के लिए तुरंत कड़े कदम उठाने की सख्त जरूरत है।